बक्सर का युद्ध 1764 (Battle of Buxar) — UPSC, SSC एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए सम्पूर्ण तथ्यात्मक नोट्स

बक्सर का युद्ध 1764 (Battle of Buxar) — UPSC, SSC notes

बक्सर का युद्ध क्या था?

बक्सर का युद्ध (Battle of Buxar) 22 अक्टूबर 1764 को बिहार के बक्सर नामक स्थान के निकट लड़ा गया था।

इस युद्ध में British East India Company की सेना का सामना तीन प्रमुख भारतीय शक्तियों के संयुक्त मोर्चे से हुआ:

  • मीर कासिम — बंगाल का पूर्व नवाब
  • शुजा-उद-दौला — अवध का नवाब और मुगल साम्राज्य का वज़ीर
  • शाह आलम द्वितीय — मुगल सम्राट

British East India Company की सेना का नेतृत्व Major Hector Munro ने किया।

युद्ध में East India Company की निर्णायक विजय हुई। NIOS के अनुसार यह विजय इतनी महत्वपूर्ण थी कि इसके बाद Company की सेना ने अवध में भी आगे बढ़कर प्रभाव स्थापित किया।


बक्सर का युद्ध कब हुआ?

तारीख: 22 अक्टूबर 1764

स्थान: बक्सर, बिहार

Company की ओर से: British East India Company

Company की सेना के कमांडर: Major Hector Munro

विरोधी गठबंधन:

  • मीर कासिम
  • शुजा-उद-दौला
  • शाह आलम द्वितीय

बक्सर के युद्ध की पृष्ठभूमि

बक्सर का युद्ध अचानक नहीं हुआ था।

इसके पीछे Bengal में East India Company और नवाब के बीच बढ़ता संघर्ष तथा Company के राजनीतिक और आर्थिक विस्तार की प्रक्रिया थी।

इसे समझने के लिए Plassey (1757) → Mir Jafar → Mir Qasim → Buxar (1764) का क्रम समझना आवश्यक है।


प्लासी के युद्ध के बाद मीर जाफर

1757 के Battle of Plassey में Siraj-ud-Daulah की हार के बाद Mir Jafar को Bengal का Nawab बनाया गया।

Mir Jafar Company के लिए पर्याप्त आर्थिक एवं राजनीतिक लाभ उपलब्ध कराने में कठिनाई महसूस करने लगा।

Company को अधिक धन और अधिक राजनीतिक लाभ की आवश्यकता थी।

इस परिस्थिति में Company ने Mir Jafar को हटाकर उसके स्थान पर Mir Qasim को Bengal का Nawab बनाया। NCERT भी बताता है कि Company ने Mir Jafar को हटाकर Mir Qasim को उसके स्थान पर स्थापित किया था।


मीर कासिम कौन था?

मीर कासिम (Mir Qasim) 1760 में Bengal का Nawab बना।

वह Company पर निर्भर रहने के बजाय अपने प्रशासन और सेना को मजबूत करना चाहता था।

उसने अपनी राजधानी Murshidabad से Munger (Monghyr) स्थानांतरित की।

उसका उद्देश्य प्रशासनिक और सैन्य नियंत्रण को मजबूत करना था।

NIOS के अनुसार मीर कासिम ने सेना को reorganize किया और राजधानी को Murshidabad से Monghyr स्थानांतरित किया।


मीर कासिम और East India Company के बीच संघर्ष

मीर कासिम और Company के बीच सबसे महत्वपूर्ण विवादों में से एक व्यापारिक सुविधाओं और शुल्क (duties) से संबंधित था।

Company के व्यापारियों को प्राप्त विशेषाधिकारों के कारण भारतीय व्यापारियों के साथ असमान स्थिति उत्पन्न हो रही थी।

मीर कासिम ने इस समस्या को समाप्त करने के लिए आंतरिक व्यापारिक शुल्कों को समाप्त करने की नीति अपनाई, जिससे Company के व्यापारियों को मिलने वाला विशेष लाभ समाप्त हो गया।

इससे Company और मीर कासिम के बीच संबंध तेजी से खराब हुए।


मीर कासिम का प्रशासनिक एवं सैन्य सुधार

मीर कासिम ने Company से स्वतंत्र स्थिति बनाने का प्रयास किया।

उसने:

  • सेना को reorganize किया।
  • राजधानी को Munger स्थानांतरित किया।
  • प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया।
  • Company के व्यापारिक विशेषाधिकारों का मुकाबला करने के लिए internal duties को समाप्त किया।

इन कदमों से Company को लगा कि मीर कासिम उसके राजनीतिक और आर्थिक हितों के लिए चुनौती बन रहा है।


मीर कासिम और Company के बीच युद्ध

1763 में Company और मीर कासिम के बीच खुला संघर्ष शुरू हुआ।

NIOS के अनुसार June 1763 में Major Adams के नेतृत्व वाली British सेना ने मीर कासिम को पराजित किया।

मीर कासिम Bengal से निकलकर Patna और फिर Awadh की ओर गया।


मीर कासिम ने किन शक्तियों से सहायता मांगी?

मीर कासिम ने Company के विरुद्ध सहायता प्राप्त करने के लिए दो महत्वपूर्ण शक्तियों से संपर्क किया:

शुजा-उद-दौला

Awadh का Nawab

वह Mughal Empire का Wazir भी था।

शाह आलम द्वितीय

Mughal Emperor

मीर कासिम ने इन दोनों के साथ मिलकर Company के विरुद्ध गठबंधन बनाया।

इस प्रकार Company के सामने एक संयुक्त भारतीय मोर्चा तैयार हुआ।


बक्सर के युद्ध में तीन प्रमुख भारतीय शक्तियाँ

बक्सर में Company के विरुद्ध तीन प्रमुख शक्तियाँ थीं:

1. मीर कासिम

पूर्व Nawab of Bengal

उसका उद्देश्य Company के बढ़ते प्रभाव का विरोध करना था।

2. शुजा-उद-दौला

Nawab of Awadh

साथ ही वह Mughal Empire का Wazir था।

3. शाह आलम द्वितीय

Mughal Emperor

उन्होंने Company के विरुद्ध इस गठबंधन में भाग लिया।


बक्सर के युद्ध में Company की सेना

East India Company की सेना का नेतृत्व:

Major Hector Munro

ने किया।

Company की सेना ने संयुक्त भारतीय सेना को निर्णायक रूप से पराजित किया।


22 अक्टूबर 1764 — बक्सर का युद्ध

22 अक्टूबर 1764 को बक्सर के मैदान में दोनों पक्षों के बीच निर्णायक युद्ध हुआ।

Company की सेना ने मीर कासिम, शुजा-उद-दौला और शाह आलम द्वितीय की संयुक्त सेना को पराजित किया।

NIOS इसे British की decisive victory के रूप में दर्ज करता है।


बक्सर के युद्ध का परिणाम

युद्ध के परिणामस्वरूप:

East India Company विजयी हुई।

संयुक्त भारतीय सेना पराजित हुई।

मीर कासिम की राजनीतिक स्थिति समाप्त हो गई।

शुजा-उद-दौला को Company के साथ समझौता करना पड़ा।

शाह आलम द्वितीय ने भी Company के साथ समझौता किया।

इसके बाद Company की राजनीतिक और राजस्व शक्ति में बहुत बड़ी वृद्धि हुई।


मीर कासिम का क्या हुआ?

बक्सर के युद्ध के बाद मीर कासिम Bengal की सत्ता से पूरी तरह बाहर हो गया।

वह Bengal वापस सत्ता में नहीं आ सका।

इस प्रकार:

Mir Qasim → Company से संघर्ष → पराजय → Bengal की सत्ता से बाहर


मीर जाफर की पुनः स्थापना

मीर कासिम के हटने के बाद Company ने Mir Jafar को फिर से Bengal का Nawab बनाया।

इस प्रकार क्रम था:

1757 — Mir Jafar

↓

1760 — Mir Qasim

↓

1763/64 — Mir Qasim का पतन

↓

Mir Jafar पुनः Nawab

NCERT भी स्पष्ट करता है कि मीर कासिम की हार के बाद Company ने मीर जाफर को पुनः स्थापित किया।


बक्सर के युद्ध के बाद अवध का क्या हुआ?

बक्सर में पराजय के बाद Shuja-ud-Daula को Company के साथ समझौता करना पड़ा।

बाद में Treaty of Allahabad (1765) के माध्यम से Company और अवध के संबंध निर्धारित हुए।

अवध को पूरी तरह Company के अधीन नहीं किया गया।

इसके बजाय अवध को एक buffer state के रूप में बनाए रखा गया।

NIOS के अनुसार Shuja-ud-Daula को उसके dominions वापस दिए गए और उसने Company के साथ defensive alliance किया; अवध Company के लिए buffer state बन गया।


इलाहाबाद की संधि, 1765

बक्सर के युद्ध के बाद 1765 में Treaty of Allahabad हुई।

यह घटनाक्रम Company के राजनीतिक विस्तार में अत्यंत महत्वपूर्ण था।

इसे समझते समय यह याद रखना चाहिए कि Battle of Buxar 1764 था, जबकि Treaty of Allahabad 1765 की घटना है।


इलाहाबाद की संधि और शुजा-उद-दौला

Shuja-ud-Daula के साथ हुए समझौते के तहत:

  • उसे अवध का क्षेत्र वापस दिया गया।
  • उसे Company को युद्ध के खर्च के लिए 50 लाख रुपये देने पड़े।
  • उसने Company के साथ defensive alliance किया।
  • अवध Company और उसके विरोधियों के बीच एक buffer state के रूप में महत्वपूर्ण बना।

NIOS इन provisions को स्पष्ट रूप से दर्ज करता है।


शाह आलम द्वितीय और Company

बक्सर के बाद Mughal Emperor Shah Alam II ने Company के साथ समझौता किया।

1765 में Company को Bengal की Diwani प्राप्त होने की प्रक्रिया में शाह आलम द्वितीय की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

NIOS के अनुसार शाह आलम द्वितीय ने Company को Bengal, Bihar और Orissa की Diwani प्रदान की और इसके बदले Company द्वारा उन्हें नियमित annual payment की व्यवस्था हुई।


Diwani Rights क्या थे?

दिवानी का अर्थ मुख्य रूप से राजस्व वसूली और civil administration से संबंधित अधिकार था।

1765 में East India Company को:

  • Bengal
  • Bihar
  • Orissa

की दिवानी प्राप्त हुई।

यह Company के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण परिवर्तन था क्योंकि अब उसे इन क्षेत्रों से प्राप्त विशाल राजस्व संसाधनों तक सीधी पहुँच मिल गई।

NCERT के अनुसार Diwani ने Company को Bengal के विशाल revenue resources का उपयोग करने की अनुमति दी। इन revenues से Company अपने खर्च, सेना और भारत में व्यापार के लिए आवश्यक वस्तुओं की खरीद को finance कर सकती थी।


बक्सर के युद्ध और Diwani का संबंध

यह सबसे महत्वपूर्ण examination point है:

Battle of Buxar = 1764

Treaty of Allahabad = 1765

Diwani of Bengal, Bihar and Orissa = 1765

इसलिए यह कहना कि:

“बक्सर के युद्ध के दिन ही Company को Diwani मिल गई”

गलत है।

बक्सर की विजय ने Company को वह राजनीतिक-सैन्य स्थिति प्रदान की जिसके बाद 1765 में Diwani की व्यवस्था हुई।


Plassey और Buxar का संबंध

दोनों युद्धों को साथ पढ़ना बहुत महत्वपूर्ण है।

Plassey — 1757

Company ने:

Siraj-ud-Daulah को पराजित किया

और

Mir Jafar को Nawab बनाया।

इससे Company का Bengal की राजनीति में प्रभाव बढ़ा।


Buxar — 1764

Company ने:

Mir Qasim + Shuja-ud-Daula + Shah Alam II

के संयुक्त मोर्चे को पराजित किया।

इसके बाद Company की सैन्य एवं राजनीतिक स्थिति बहुत मजबूत हुई।


Plassey बनाम Buxar

आधारप्लासी का युद्धबक्सर का युद्ध
वर्ष17571764
तारीख23 जून 175722 अक्टूबर 1764
स्थानप्लासी, बंगालबक्सर, बिहार
Company commanderRobert CliveMajor Hector Munro
मुख्य विरोधीSiraj-ud-DaulahMir Qasim + Shuja-ud-Daula + Shah Alam II
Company की स्थितिविजयीविजयी
तत्काल राजनीतिक परिणामMir Jafar नवाब बनाCompany की स्थिति बहुत मजबूत हुई
Diwaniतत्काल नहीं1765 के बाद
प्रमुख अगला घटनाक्रमCompany का Bengal में प्रभावTreaty of Allahabad और Diwani, 1765

बक्सर का युद्ध प्लासी से अधिक निर्णायक क्यों माना जाता है?

यहाँ “अधिक निर्णायक” को एक historical interpretation के रूप में समझना चाहिए, न कि किसी आधिकारिक ranking के रूप में।

Plassey में Company ने Bengal के नवाब को पराजित करके Bengal की राजनीति में प्रभाव स्थापित किया था।

लेकिन Buxar में Company ने तीन महत्वपूर्ण शक्तियों के संयुक्त मोर्चे को पराजित किया:

Bengal का पूर्व Nawab + Awadh का Nawab + Mughal Emperor

इसके बाद 1765 में Company को Bengal, Bihar और Orissa की Diwani प्राप्त हुई।

इससे Company को राजनीतिक प्रभाव के साथ विशाल राजस्व संसाधनों तक पहुँच मिली। NCERT बताता है कि Diwani के बाद Bengal के revenues से Company अपने खर्च, सैनिकों तथा भारतीय वस्तुओं की खरीद को finance कर सकी।


बक्सर के युद्ध का आर्थिक महत्व

1765 में Diwani प्राप्त होने के बाद Company को Bengal के विशाल revenue resources का उपयोग करने का अवसर मिला।

इससे Company:

  • अपनी सेना का खर्च उठा सकती थी।
  • प्रशासनिक खर्च पूरा कर सकती थी।
  • Fort और offices के खर्च पूरे कर सकती थी।
  • भारत से cotton और silk textiles खरीद सकती थी।
  • भारत से होने वाले व्यापार को भारतीय revenue से finance कर सकती थी।

NCERT के अनुसार Diwani के बाद Company के भारतीय व्यापार के लिए Britain से gold और silver लाने की आवश्यकता काफी हद तक समाप्त हो गई, क्योंकि Indian revenues से Company के खर्च और purchases को finance किया जा सकता था।


बक्सर के युद्ध का राजनीतिक महत्व

बक्सर की विजय के बाद East India Company:

  • Bengal की राजनीति में अधिक शक्तिशाली हुई।
  • Awadh पर प्रभाव स्थापित करने में सफल हुई।
  • Mughal Emperor के साथ महत्वपूर्ण राजनीतिक समझौता करने की स्थिति में आई।
  • Bengal, Bihar और Orissa के revenue system में निर्णायक भूमिका प्राप्त करने लगी।

NIOS के अनुसार बक्सर के बाद Company की विजय ने उसे अवध तक सैन्य रूप से आगे बढ़ने में सक्षम बनाया।


Dual Government की पृष्ठभूमि

1765 में Diwani प्राप्त करने के बाद Bengal में Dual Government (द्वैध शासन) की व्यवस्था स्थापित हुई।

इस व्यवस्था का संबंध मुख्य रूप से:

Diwani → East India Company

और

Nizamat → Nawab

से था।

Robert Clive ने 1765 के बाद इस व्यवस्था को लागू किया।

बाद में Warren Hastings ने 1772 में Dual Government समाप्त कर दिया।

इसलिए exam sequence:

Buxar — 1764

↓

Treaty of Allahabad — 1765

↓

Diwani — 1765

↓

Dual Government — 1765

↓

Dual Government समाप्त — 1772


बक्सर के युद्ध से जुड़े प्रमुख व्यक्ति

Major Hector Munro

पक्ष: East India Company

भूमिका: Buxar में Company की सेना के commander


Mir Qasim

पद: Bengal का Nawab

स्थिति: Company से संघर्ष

Buxar: Company के विरुद्ध गठबंधन का हिस्सा

परिणाम: पराजय और Bengal की राजनीति से बाहर


Shuja-ud-Daula

पद: Nawab of Awadh

अन्य पद: Mughal Empire का Wazir

Buxar: Company के विरुद्ध गठबंधन में शामिल

परिणाम: Company से Treaty/settlement


Shah Alam II

पद: Mughal Emperor

Buxar: Company के विरुद्ध गठबंधन का हिस्सा

1765: Company को Bengal, Bihar और Orissa की Diwani प्रदान करने की व्यवस्था से जुड़ा


Mir Jafar

पद: Bengal का Nawab

Buxar से संबंध: Mir Qasim के बाद Company ने उसे फिर Bengal का Nawab बनाया।


बक्सर का युद्ध और Regulating Act 1773

इन घटनाओं को chronological sequence में पढ़ना उपयोगी है:

1757 — Plassey

↓

1764 — Buxar

↓

1765 — Diwani

↓

1765 — Dual Government

↓

1772 — Dual Government समाप्त

↓

1773 — Regulating Act

इस sequence से Company के व्यापारिक संगठन से territorial power बनने की प्रक्रिया समझने में मदद मिलती है।


UPSC Prelims के लिए सबसे महत्वपूर्ण Facts

Fact 1

Battle of Buxar कब हुआ?

22 October 1764


Fact 2

Buxar कहाँ स्थित है?

बिहार में।


Fact 3

Company की सेना का नेतृत्व किसने किया?

Major Hector Munro


Fact 4

Company के विरुद्ध संयुक्त मोर्चे में कौन थे?

  • Mir Qasim
  • Shuja-ud-Daula
  • Shah Alam II

Fact 5

Shuja-ud-Daula कौन था?

Nawab of Awadh तथा Mughal Empire का Wazir।


Fact 6

Shah Alam II कौन था?

Mughal Emperor।


Fact 7

Buxar के बाद Mir Jafar का क्या हुआ?

Company ने उसे पुनः Bengal का Nawab बनाया।


Fact 8

क्या Buxar के तुरंत बाद Diwani उसी दिन मिल गई?

नहीं।

Diwani की व्यवस्था 1765 में हुई।


Fact 9

Diwani किन क्षेत्रों की थी?

Bengal, Bihar और Orissa


Fact 10

Diwani किसने प्रदान की?

Mughal Emperor Shah Alam II ने Company को प्रदान की।


Fact 11

Treaty of Allahabad कब हुई?

1765


Fact 12

Shuja-ud-Daula को क्या करना पड़ा?

Company के साथ समझौता करना पड़ा और युद्ध के खर्च के रूप में 50 लाख रुपये देने पड़े; उसके क्षेत्र वापस किए गए और Company के साथ defensive alliance हुआ।


Fact 13

Awadh को पूरी तरह Company में मिला लिया गया था?

नहीं।

Awadh को Company के लिए एक buffer state के रूप में बनाए रखा गया।


Prelims में पूछे जाने योग्य Statement-Based Questions

Statement 1

Battle of Buxar was fought in 1764.

उत्तर: सही


Statement 2

Major Hector Munro led the East India Company’s army at Buxar.

उत्तर: सही


Statement 3

Shah Alam II fought against the East India Company at Buxar.

उत्तर: सही


Statement 4

Shuja-ud-Daula was the Nawab of Bengal at the time of the Battle of Buxar.

उत्तर: गलत

वह Nawab of Awadh था।


Statement 5

Mir Qasim was one of the principal opponents of the Company at Buxar.

उत्तर: सही


Statement 6

The Battle of Buxar directly gave the Company Diwani rights on 22 October 1764.

उत्तर: गलत

Diwani की व्यवस्था 1765 में हुई।


Statement 7

The Company obtained Diwani of Bengal, Bihar and Orissa in 1765.

उत्तर: सही


Statement 8

The Battle of Buxar took place before the Battle of Plassey.

उत्तर: गलत

Plassey — 1757

Buxar — 1764


Statement 9

Mir Jafar was reinstalled as Nawab of Bengal after the fall of Mir Qasim.

उत्तर: सही


Statement 10

Awadh was immediately annexed by the Company after Buxar.

उत्तर: गलत

Awadh को buffer state के रूप में बनाए रखा गया।


परीक्षा उपयोगी सबसे महत्वपूर्ण Timeline

1757 — Battle of Plassey

1760 — Mir Qasim becomes Nawab of Bengal

1763 — Company defeats Mir Qasim’s forces

22 October 1764 — Battle of Buxar

1765 — Treaty of Allahabad

1765 — Company gets Diwani of Bengal, Bihar and Orissa

1765 — Dual Government begins in Bengal

1772 — Dual Government ends

1773 — Regulating Act


एक नजर में पूरा Chapter

तथ्यउत्तर
युद्धBattle of Buxar
हिंदी नामबक्सर का युद्ध
वर्ष1764
तारीख22 अक्टूबर 1764
स्थानबक्सर, बिहार
Company commanderMajor Hector Munro
Company के विरुद्धMir Qasim + Shuja-ud-Daula + Shah Alam II
Mir Qasimपूर्व Nawab of Bengal
Shuja-ud-DaulaNawab of Awadh + Mughal Wazir
Shah Alam IIMughal Emperor
परिणामEast India Company की निर्णायक विजय
Mir Jafarपुनः Bengal का Nawab
Treaty of Allahabad1765
Diwani1765
Diwani के क्षेत्रBengal, Bihar, Orissa
Dual Government1765
Dual Government समाप्त1772

Plassey → Buxar → Diwani: सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा-क्रम

इसे तीन lines में याद करें:

1757 — Plassey
Company ने Bengal की राजनीति में निर्णायक प्रभाव स्थापित किया।

1764 — Buxar
Company ने Mir Qasim, Shuja-ud-Daula और Shah Alam II के संयुक्त मोर्चे को पराजित किया।

1765 — Diwani
Company को Bengal, Bihar और Orissa की Diwani प्राप्त हुई।

यही sequence भारत में East India Company के व्यापारिक शक्ति से राजनीतिक एवं राजस्व शक्ति बनने की प्रक्रिया को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। NCERT के अनुसार Diwani के बाद Bengal के revenue resources Company के खर्च, सेना और व्यापार को finance करने का प्रमुख साधन बने।


अंतिम Revision Table — बक्सर का युद्ध एवं संबंधित घटनाएँ

क्रममहत्वपूर्ण तथ्यउत्तर
1बक्सर का युद्ध (Battle of Buxar)22 अक्टूबर 1764
2युद्ध का स्थानबक्सर, बिहार
3East India Company की सेना का CommanderMajor Hector Munro
4Company के विरुद्ध गठबंधनमीर कासिम + शुजा-उद-दौला + शाह आलम द्वितीय
5मीर कासिमबंगाल का पूर्व नवाब
6शुजा-उद-दौलाअवध का नवाब तथा मुगल साम्राज्य का वज़ीर
7शाह आलम द्वितीयमुगल सम्राट
8बक्सर के युद्ध का परिणामEast India Company की निर्णायक विजय
9मीर कासिम की हार के बाद बंगाल का नवाबमीर जाफर को पुनः नवाब बनाया गया
10इलाहाबाद की संधि (Treaty of Allahabad)1765
11Company को Diwani प्राप्त1765
12Diwani के क्षेत्रबंगाल, बिहार और उड़ीसा
13द्वैध शासन (Dual Government) की शुरुआत1765
14द्वैध शासन समाप्त1772 — Warren Hastings
15Regulating Act1773

सबसे महत्वपूर्ण अंतर:
Plassey (1757) ने Company का Bengal में राजनीतिक प्रभाव बढ़ाया, जबकि Buxar (1764) की विजय के बाद 1765 में Diwani प्राप्त होने से Company को Bengal, Bihar और Orissa के विशाल राजस्व संसाधनों तक अधिकार मिला।


रेगुलेटिंग एक्ट

1773

प्लासी का युद्ध

1757

पूना पैक्ट

1932

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