तराइन का द्वितीय युद्ध 1992 — Second Battle of Tarain, 1192-SSC,UPSC & Notes in hindi

तराइन का द्वितीय युद्ध 1992

विषय का परिचय

तराइन का द्वितीय युद्ध (Second Battle of Tarain) 1192 ईस्वी में चौहान शासक पृथ्वीराज चौहान III और मुहम्मद गोरी (Muizuddin Muhammad bin Sam) के बीच हुआ। इस युद्ध में मुहम्मद गोरी विजयी हुआ।

यह युद्ध उत्तर भारत के मध्यकालीन इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना माना जाता है क्योंकि इसके बाद ग़ोरी शक्ति का उत्तर भारत में प्रभाव बढ़ा और दिल्ली-अजमेर क्षेत्र की राजनीतिक स्थिति में महत्वपूर्ण परिवर्तन आया।

Exam Core: 1192 = द्वितीय तराइन = मुहम्मद गोरी की विजय

मूल अवधारणा

तराइन का द्वितीय युद्ध, 1191 ईस्वी के प्रथम तराइन युद्ध का अगला चरण था।

दोनों युद्धों को साथ समझें

युद्धवर्षविजेता
प्रथम तराइन1191पृथ्वीराज चौहान
द्वितीय तराइन1192मुहम्मद गोरी

याद रखने का सबसे आसान तरीका:
1191 → पृथ्वीराज
1192 → गोरी

युद्ध की पृष्ठभूमि

1191 के प्रथम तराइन युद्ध में मुहम्मद गोरी को पृथ्वीराज चौहान के हाथों पराजित होना पड़ा था। इसके बाद गोरी ने अपनी पिछली पराजय से सीख लेते हुए पुनः तैयारी की और अगले वर्ष भारत की ओर अभियान किया।

1192 में दोनों सेनाएँ फिर तराइन के मैदान में आमने-सामने हुईं।

इस बार मुहम्मद गोरी ने अधिक योजनाबद्ध सैन्य रणनीति अपनाई और पृथ्वीराज की सेना को पराजित किया।

युद्ध के प्रमुख पक्ष

पक्षशासकप्रमुख क्षेत्र
चौहान पक्षपृथ्वीराज चौहान IIIअजमेर-दिल्ली क्षेत्र
ग़ोरी पक्षमुहम्मद गोरीग़ोर/ग़ज़नी से संचालित क्षेत्र

मुहम्मद गोरी की रणनीति

द्वितीय तराइन युद्ध में गोरी की सफलता में उसकी घुड़सवार सेना और गतिशील युद्ध-रणनीति को महत्वपूर्ण माना जाता है।

उसकी सेना ने तेज गति से आक्रमण, पीछे हटने का आभास तथा पुनः आक्रमण जैसी रणनीतियों का उपयोग किया।

महत्वपूर्ण सैन्य बिंदु

  • तेज गति वाली घुड़सवार सेना का उपयोग।
  • दूर से तीरंदाजी का प्रयोग।
  • शत्रु को लगातार दबाव में रखना।
  • पारंपरिक सीधी भिड़ंत के बजाय अधिक गतिशील युद्ध-पद्धति।
  • पृथ्वीराज की सेना को थकाने और उसकी युद्ध-व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास।

सावधानी: मध्यकालीन स्रोतों में युद्ध की सैन्य संख्या और कुछ रणनीतिक विवरणों में अंतर मिलता है। इसलिए परीक्षा में अत्यधिक विशिष्ट सैनिक संख्या को स्थापित तथ्य की तरह याद करना उचित नहीं है।

युद्ध का परिणाम

1192 ईस्वी में मुहम्मद गोरी विजयी हुआ।

पृथ्वीराज चौहान की सेना पराजित हुई और इसके बाद चौहान शक्ति को गंभीर राजनीतिक झटका लगा।

द्वितीय तराइन के बाद उत्तर भारत में ग़ोरी प्रभाव के विस्तार का मार्ग अधिक खुला।

द्वितीय तराइन युद्ध का ऐतिहासिक महत्व

1. चौहान शक्ति को बड़ा राजनीतिक झटका

युद्ध में पराजय के कारण पृथ्वीराज की राजनीतिक शक्ति कमजोर हुई।

2. ग़ोरी प्रभाव का विस्तार

विजय के बाद मुहम्मद गोरी का उत्तर भारत में प्रभाव बढ़ा।

3. दिल्ली-अजमेर क्षेत्र पर प्रभाव

ग़ोरी विजय के बाद दिल्ली और अजमेर की राजनीतिक स्थिति में महत्वपूर्ण परिवर्तन आया।

4. आगे के तुर्की शासन की पृष्ठभूमि

मुहम्मद गोरी की विजयों के बाद उसके सेनापतियों, विशेषकर कुतुबुद्दीन ऐबक, ने उत्तर भारत में ग़ोरी सत्ता को आगे बढ़ाया।

बाद में दिल्ली में मामलुक/गुलाम वंश की स्थापना हुई।

महत्वपूर्ण: द्वितीय तराइन को सीधे “दिल्ली सल्तनत की स्थापना” के समान नहीं मानना चाहिए। यह उस राजनीतिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण था जिसने आगे चलकर दिल्ली सल्तनत के उदय का मार्ग तैयार किया।

पृथ्वीराज चौहान का क्या हुआ?

द्वितीय तराइन के बाद पृथ्वीराज चौहान को मुहम्मद गोरी ने बंदी बनाया। उसके बाद उसके भाग्य के संबंध में विभिन्न स्रोतों और परंपराओं में अलग-अलग विवरण मिलते हैं।

परीक्षा में सावधानी

लोकप्रिय कथा में चंदबरदाई और शब्दभेदी बाण से पृथ्वीराज द्वारा मुहम्मद गोरी की हत्या का प्रसंग प्रसिद्ध है।

लेकिन इसे स्थापित ऐतिहासिक तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।

मुहम्मद गोरी की मृत्यु बाद में 1206 ईस्वी में हुई थी।

Exam Trap: “पृथ्वीराज ने 1192 के बाद मुहम्मद गोरी को मार दिया” — इसे प्रमाणित ऐतिहासिक तथ्य के रूप में न लिखें।

द्वितीय तराइन और दिल्ली सल्तनत

द्वितीय तराइन के बाद ग़ोरी सत्ता का विस्तार हुआ। मुहम्मद गोरी ने भारत में अपने अधीन क्षेत्रों के प्रशासन के लिए अपने विश्वसनीय सेनापतियों को नियुक्त किया।

इनमें कुतुबुद्दीन ऐबक सबसे महत्वपूर्ण था।

बाद में 1206 ईस्वी में मुहम्मद गोरी की मृत्यु के बाद कुतुबुद्दीन ऐबक ने भारत में स्वतंत्र सत्ता स्थापित की और मामलुक/गुलाम वंश की शुरुआत हुई।

इसलिए ऐतिहासिक क्रम को इस तरह याद करना उपयोगी है:

1192 → द्वितीय तराइन → ग़ोरी विजय → उत्तर भारत में ग़ोरी प्रभाव का विस्तार → कुतुबुद्दीन ऐबक → 1206 में स्वतंत्र सत्ता → दिल्ली सल्तनत का प्रारंभिक चरण

प्रथम और द्वितीय तराइन : सबसे महत्वपूर्ण तुलना

आधारप्रथम तराइनद्वितीय तराइन
वर्ष11911192
युद्धपृथ्वीराज बनाम गोरीपृथ्वीराज बनाम गोरी
विजेतापृथ्वीराज चौहानमुहम्मद गोरी
परिणामगोरी पीछे हटाचौहान शक्ति पराजित
गोरी की स्थितिघायल होकर पीछे हटानिर्णायक विजय
ऐतिहासिक प्रभावगोरी के विस्तार को अस्थायी रोकग़ोरी प्रभाव का विस्तार

MCQ का सबसे सामान्य Trap: दोनों युद्धों के पक्ष समान हैं; वर्ष और परिणाम अलग हैं।

तराइन और चंदावर का संबंध

द्वितीय तराइन के बाद उत्तर भारत में ग़ोरी प्रभाव बढ़ा। इसके बाद 1194 ईस्वी का चंदावर युद्ध महत्वपूर्ण हुआ।

युद्धवर्षप्रमुख पक्षपरिणाम
प्रथम तराइन1191पृथ्वीराज बनाम गोरीपृथ्वीराज विजयी
द्वितीय तराइन1192पृथ्वीराज बनाम गोरीगोरी विजयी
चंदावर1194जयचंद्र बनाम गोरीगोरी विजयी

Exam Formula:
1191 → पृथ्वीराज
1192 → गोरी
1194 → जयचंद्र पर गोरी की विजय

महत्वपूर्ण व्यक्तित्व

पृथ्वीराज चौहान III

  • चौहान वंश का प्रमुख शासक।
  • अजमेर तथा दिल्ली क्षेत्र से संबंधित।
  • प्रथम तराइन युद्ध में विजयी।
  • द्वितीय तराइन युद्ध में पराजित।

मुहम्मद गोरी

  • ग़ोर क्षेत्र का शासक।
  • उत्तर भारत में तुर्की शक्ति के विस्तार से संबंधित प्रमुख शासक।
  • 1191 में प्रथम तराइन में पराजित।
  • 1192 में द्वितीय तराइन में विजयी।
  • उसके अधीन कुतुबुद्दीन ऐबक ने भारत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कुतुबुद्दीन ऐबक

  • मुहम्मद गोरी का प्रमुख सैन्य अधिकारी/अधीनस्थ।
  • गोरी की मृत्यु के बाद भारत में स्वतंत्र सत्ता स्थापित की।
  • मामलुक या गुलाम वंश का प्रारंभिक शासक।

महत्वपूर्ण स्थान

स्थानमहत्व
तराइन/तरावड़ीदोनों तराइन युद्धों का युद्धक्षेत्र
अजमेरचौहान सत्ता का प्रमुख केंद्र
दिल्लीचौहान और बाद में ग़ोरी सत्ता के लिए महत्वपूर्ण केंद्र
भटिंडा/तबरहिंदगोरी के प्रारंभिक अभियान से संबंधित महत्वपूर्ण दुर्ग
चंदावर1194 के गोरी-जयचंद्र संघर्ष का स्थान

अक्सर भ्रमित करने वाले तथ्य

प्रथम बनाम द्वितीय तराइन

1191 → पृथ्वीराज विजयी

1192 → गोरी विजयी

तराइन बनाम चंदावर

तराइन: पृथ्वीराज और मुहम्मद गोरी

चंदावर: जयचंद्र और मुहम्मद गोरी

मुहम्मद गोरी बनाम महमूद ग़ज़नी

दोनों अलग-अलग शासक थे।

  • महमूद ग़ज़नी — 11वीं शताब्दी
  • मुहम्मद गोरी — 12वीं-13वीं शताब्दी का संक्रमणकाल
  • पृथ्वीराज चौहान का प्रमुख संघर्ष मुहम्मद गोरी से हुआ।

पृथ्वीराज और जयचंद्र

दोनों को एक ही व्यक्ति न समझें।

  • पृथ्वीराज चौहान → तराइन
  • जयचंद्र (गाहड़वाल शासक) → चंदावर

UPSC/PCS के लिए विशेष तथ्य

  • द्वितीय तराइन युद्ध 1192 ईस्वी में हुआ।
  • युद्ध पृथ्वीराज चौहान III और मुहम्मद गोरी के बीच हुआ।
  • मुहम्मद गोरी विजयी हुआ।
  • यह युद्ध प्रथम तराइन युद्ध के एक वर्ष बाद हुआ।
  • प्रथम तराइन में पृथ्वीराज की विजय हुई थी।
  • द्वितीय तराइन के बाद ग़ोरी राजनीतिक प्रभाव उत्तर भारत में बढ़ा।
  • कुतुबुद्दीन ऐबक ने गोरी की भारतीय विजयों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • 1206 में गोरी की मृत्यु के बाद ऐबक ने भारत में स्वतंत्र सत्ता स्थापित की।
  • आगे चलकर मामलुक/गुलाम वंश का उदय हुआ।
  • द्वितीय तराइन को दिल्ली सल्तनत के उदय की महत्वपूर्ण पृष्ठभूमि के रूप में समझना चाहिए, न कि स्वयं दिल्ली सल्तनत की स्थापना की तिथि के रूप में।

UPSC/PCS Mains के लिए महत्व

द्वितीय तराइन युद्ध को उत्तर भारत में राजनीतिक शक्ति-संतुलन के परिवर्तन के संदर्भ में समझा जा सकता है।

उत्तर में तीन स्तर उपयोगी हैं:

पृष्ठभूमि: चौहान और ग़ोरी शक्तियों का संघर्ष तथा प्रथम तराइन की पृष्ठभूमि।

मुख्य घटना: 1192 में मुहम्मद गोरी की विजय और चौहान शक्ति की पराजय।

दीर्घकालीन प्रभाव: उत्तर भारत में ग़ोरी प्रभाव का विस्तार, कुतुबुद्दीन ऐबक की भूमिका और आगे चलकर दिल्ली सल्तनत के प्रारंभिक चरण की पृष्ठभूमि।

Exam Facts / One-Liners

  • द्वितीय तराइन युद्ध — 1192 ईस्वी।
  • युद्ध पृथ्वीराज चौहान और मुहम्मद गोरी के बीच हुआ।
  • विजेता — मुहम्मद गोरी।
  • प्रथम तराइन — 1191।
  • द्वितीय तराइन — 1192।
  • प्रथम तराइन में पृथ्वीराज विजयी हुआ।
  • द्वितीय तराइन में गोरी विजयी हुआ।
  • दोनों युद्धों का प्रमुख युद्धक्षेत्र तराइन/तरावड़ी था।
  • तराइन वर्तमान हरियाणा से संबंधित है।
  • चंदावर का युद्ध — 1194।
  • चंदावर में गोरी का संघर्ष जयचंद्र से हुआ।
  • कुतुबुद्दीन ऐबक मुहम्मद गोरी का प्रमुख सेनापति/अधीनस्थ था।
  • 1206 में गोरी की मृत्यु के बाद ऐबक ने भारत में स्वतंत्र सत्ता स्थापित की।
  • द्वितीय तराइन उत्तर भारत में ग़ोरी शक्ति के विस्तार का महत्वपूर्ण चरण था।
  • पृथ्वीराज द्वारा बाद में गोरी की हत्या की लोकप्रिय कथा को प्रमाणित इतिहास के रूप में नहीं पढ़ना चाहिए।

याद रखने की ट्रिक

तराइन की दो तारीखें

“91 में चौहान, 92 में गोरी”

बस यह क्रम याद रखें:

1191 → प्रथम → पृथ्वीराज

1192 → द्वितीय → गोरी

आगे का क्रम

1191 → पृथ्वीराज

1192 → गोरी

1194 → चंदावर → जयचंद्र

1206 → गोरी की मृत्यु → ऐबक की स्वतंत्र सत्ता

Quick Revision

द्वितीय तराइन युद्ध = 1192 + पृथ्वीराज चौहान + मुहम्मद गोरी + गोरी की विजय

  • वर्ष: 1192 ईस्वी
  • स्थान: तराइन/तरावड़ी, हरियाणा
  • पक्ष: पृथ्वीराज चौहान III बनाम मुहम्मद गोरी
  • विजेता: मुहम्मद गोरी
  • पिछला युद्ध: प्रथम तराइन, 1191
  • प्रथम युद्ध का विजेता: पृथ्वीराज चौहान
  • मुख्य प्रभाव: उत्तर भारत में ग़ोरी प्रभाव का विस्तार
  • प्रमुख अधीनस्थ: कुतुबुद्दीन ऐबक
  • अगला महत्वपूर्ण युद्ध: चंदावर, 1194
  • 1206: मुहम्मद गोरी की मृत्यु और ऐबक की स्वतंत्र सत्ता

परीक्षा का अंतिम सूत्र

1191 → प्रथम तराइन → पृथ्वीराज विजयी
1192 → द्वितीय तराइन → गोरी विजयी
1194 → चंदावर → जयचंद्र पर गोरी की विजय
1206 → गोरी की मृत्यु → ऐबक की स्वतंत्र सत्ता

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