परीक्षा दृष्टिकोण (Exam Focus): यह नोट्स UPSC Prelims, UPSC Mains (GS-I), SSC CGL, CHSL, MTS, CPO, State PSC, Railway, NDA, CDS तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के नवीनतम पैटर्न को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं। इसमें मानक ऐतिहासिक स्रोतों के आधार पर तथ्यात्मक एवं विश्लेषणात्मक जानकारी दी गई है।
- क्षत्रपति शिवाजी नोट्स : भाग-1
- जीवन परिचय, प्रारम्भिक जानकारी
- क्षत्रपति शिवाजी नोट्स : भाग-2
- अफजल खान प्रकरण, पन्हाला का घेराव, शाइस्ता खान पर आक्रमण, सूरत अभियान, पुरन्दर की संधि, आगरा की घटना, आगरा से पलायन, पुनः विजय अभियान, राज्याभिषेक तथा दक्षिणी अभियान।
- क्षत्रपति शिवाजी नोट्स : भाग-3
- शिवाजी महाराज की प्रशासनिक व्यवस्था, अष्टप्रधान परिषद, राजस्व व्यवस्था, सैन्य संगठन, नौसेना, दुर्ग नीति, न्याय व्यवस्था, धार्मिक नीति, आर्थिक नीति, व्यापार, मुद्रा व्यवस्था तथा शासन प्रणाली।
- क्षत्रपति शिवाजी नोट्स : भाग-4
- शिवाजी महाराज के उत्तराधिकारी, प्रमुख ऐतिहासिक स्रोत, इतिहासकारों की राय, शिवाजी का व्यक्तित्व एवं विरासत, महत्वपूर्ण तिथियाँ, कालक्रम (Timeline), परीक्षा हेतु तथ्य, वन-लाइनर, Revision Notes तथा UPSC/SSC दृष्टिकोण।
- क्षत्रपति शिवाजी नोट्स : भाग-5
- UPSC, SSC, State PSC, Railway तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न संग्रह।
छत्रपति शिवाजी महाराज : भाग 1
छत्रपति शिवाजी महाराज : परिचय (Introduction)
छत्रपति शिवाजी महाराज भारत के महानतम शासकों, सैन्य रणनीतिकारों एवं राष्ट्रनिर्माताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने 17वीं शताब्दी में दक्षिण भारत के दक्कन क्षेत्र में हिन्दवी स्वराज्य की स्थापना कर मराठा शक्ति को संगठित किया। उनका उद्देश्य केवल राज्य विस्तार नहीं था, बल्कि जनता को अत्याचार, अन्याय और विदेशी प्रभुत्व से मुक्त कर न्यायपूर्ण शासन स्थापित करना था।
शिवाजी महाराज ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी असाधारण नेतृत्व क्षमता, गुरिल्ला युद्ध नीति, प्रशासनिक दक्षता तथा मजबूत नौसेना के माध्यम से बीजापुर सल्तनत, मुगल साम्राज्य और अन्य शक्तियों को चुनौती दी।
आज भी उन्हें भारत के सर्वश्रेष्ठ सैन्य रणनीतिकारों, कुशल प्रशासकों तथा राष्ट्रनायकों में गिना जाता है।
शिवाजी महाराज का जीवन परिचय
| विषय | विवरण |
|---|---|
| पूरा नाम | छत्रपति शिवाजी भोसले |
| जन्म | 19 फरवरी 1630 ई. (अधिकांश आधुनिक इतिहासकारों द्वारा स्वीकार) |
| जन्म स्थान | शिवनेरी दुर्ग, जुन्नर, पुणे (वर्तमान महाराष्ट्र) |
| पिता | शाहजी राजे भोसले |
| माता | राजमाता जीजाबाई |
| वंश | भोसले (मराठा) |
| राज्याभिषेक | 6 जून 1674 ई. |
| राज्याभिषेक स्थल | रायगढ़ दुर्ग |
| उपाधि | छत्रपति |
| राजधानी | रायगढ़ |
| मृत्यु | 3 अप्रैल 1680 ई. |
| मृत्यु स्थान | रायगढ़ दुर्ग |
शिवाजी महाराज का जन्म एवं पारिवारिक पृष्ठभूमि
जन्म
शिवाजी महाराज का जन्म 19 फरवरी 1630 ई. को महाराष्ट्र के पुणे जिले के निकट स्थित शिवनेरी दुर्ग में हुआ।
उनके जन्म के समय दक्कन क्षेत्र में राजनीतिक अस्थिरता थी। बीजापुर, गोलकुंडा, अहमदनगर तथा मुगल साम्राज्य के बीच निरंतर संघर्ष चल रहा था।
इसी अस्थिर राजनीतिक वातावरण ने शिवाजी के व्यक्तित्व को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पिता – शाहजी राजे भोसले
शाहजी भोसले एक कुशल सेनानायक एवं राजनीतिज्ञ थे।
उन्होंने विभिन्न समयों में—
- अहमदनगर सल्तनत
- बीजापुर सल्तनत
की सेवा की।
वे दक्षिण भारत के प्रमुख मराठा सरदारों में गिने जाते थे।
उनका अधिकांश समय युद्ध अभियानों में बीतता था, इसलिए शिवाजी का पालन-पोषण मुख्यतः उनकी माता ने किया।
माता – राजमाता जीजाबाई
प्रतियोगी परीक्षाओं में यदि किसी एक व्यक्ति का शिवाजी के व्यक्तित्व निर्माण में सर्वाधिक योगदान पूछा जाए, तो उत्तर होगा—
राजमाता जीजाबाई।
उन्होंने शिवाजी को—
- रामायण
- महाभारत
- वीर राजाओं की कथाएँ
- भारतीय संस्कृति
- धर्म
- न्याय
- स्वाभिमान
- राष्ट्रभक्ति
का संस्कार दिया।
जीजाबाई ने बाल्यावस्था से ही शिवाजी में स्वतंत्र राज्य स्थापित करने की प्रेरणा उत्पन्न की।
शिवाजी के व्यक्तित्व निर्माण में प्रमुख व्यक्तियों का योगदान
राजमाता जीजाबाई
योगदान
- धार्मिक एवं नैतिक शिक्षा
- राष्ट्रभक्ति
- स्वराज्य की प्रेरणा
- नेतृत्व क्षमता का विकास
दादोजी कोंडदेव
दादोजी कोंडदेव शाहजी भोसले के विश्वसनीय अधिकारी थे।
उन्होंने शिवाजी को
- प्रशासन
- भूमि प्रबंधन
- सैन्य प्रशिक्षण
- संगठन
- घुड़सवारी
- शस्त्र संचालन
का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।
समर्थ रामदास स्वामी
यह प्रतियोगी परीक्षाओं का महत्वपूर्ण तथ्य है।
समर्थ रामदास को शिवाजी का आध्यात्मिक प्रेरणास्रोत माना जाता है।
ध्यान दें
आधुनिक इतिहासकारों के अनुसार समर्थ रामदास को शिवाजी का औपचारिक गुरु मानने पर सर्वसम्मति नहीं है।
UPSC में सुरक्षित उत्तर
- आध्यात्मिक प्रेरणा – समर्थ रामदास
- व्यक्तित्व निर्माण – जीजाबाई
- प्रशासनिक एवं सैनिक प्रशिक्षण – दादोजी कोंडदेव
17वीं शताब्दी में दक्कन की राजनीतिक स्थिति
शिवाजी के उदय को समझने के लिए उस समय की राजनीतिक परिस्थिति जानना आवश्यक है।
प्रमुख शक्तियाँ
- मुगल साम्राज्य
- बीजापुर सल्तनत
- गोलकुंडा सल्तनत
- पुर्तगाली
- अंग्रेज
- डच
- सिद्दी
इन सभी शक्तियों के बीच लगातार संघर्ष चल रहा था।
इसी राजनीतिक अव्यवस्था का लाभ उठाकर शिवाजी ने अपना स्वतंत्र राज्य स्थापित किया।
हिन्दवी स्वराज्य (Hindavi Swarajya) की अवधारणा
हिन्दवी स्वराज्य क्या था?
हिन्दवी स्वराज्य का अर्थ था—
जनता के हित में जनता द्वारा संचालित स्वतंत्र एवं न्यायपूर्ण शासन।
यह केवल धार्मिक अवधारणा नहीं थी।
इसका मुख्य उद्देश्य था—
- विदेशी प्रभुत्व से मुक्ति
- न्यायपूर्ण शासन
- जनता की सुरक्षा
- किसानों की रक्षा
- प्रशासनिक सुधार
हिन्दवी स्वराज्य की प्रमुख विशेषताएँ
- न्याय आधारित शासन
- धार्मिक सहिष्णुता
- किसानों की सुरक्षा
- भ्रष्टाचार पर नियंत्रण
- अनुशासित सेना
- मजबूत किला व्यवस्था
- शक्तिशाली नौसेना
- स्थानीय प्रशासन को महत्व
शिवाजी महाराज के प्रारम्भिक अभियान
युवावस्था में ही शिवाजी ने छोटे-छोटे दुर्गों पर अधिकार करना प्रारम्भ कर दिया।
प्रमुख प्रारम्भिक विजय
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 1646 | तोरणा दुर्ग पर अधिकार |
| 1647 | कोंढाणा (बाद में सिंहगढ़) पर प्रभाव |
| 1647–48 | पुरंदर क्षेत्र में प्रभाव |
| 1648 | चाकन क्षेत्र में विस्तार |
तोरणा दुर्ग शिवाजी की पहली बड़ी विजय मानी जाती है।
इसी विजय से उनके स्वतंत्र राज्य की नींव मजबूत हुई।
तोरणा दुर्ग का महत्व
तोरणा दुर्ग शिवाजी की प्रारम्भिक सफलता का प्रतीक है।
इस दुर्ग पर अधिकार करने के बाद
- सैन्य शक्ति बढ़ी
- आर्थिक संसाधन प्राप्त हुए
- सैनिकों का मनोबल बढ़ा
- मराठा शक्ति संगठित हुई
रायगढ़ दुर्ग का महत्व
रायगढ़ बाद में शिवाजी की राजधानी बना।
यहीं
- राज्याभिषेक हुआ
- प्रशासन संचालित हुआ
- राजकोष रखा गया
रायगढ़ मराठा साम्राज्य का राजनीतिक केन्द्र बन गया।
शिवाजी की सैन्य सोच
शिवाजी समझते थे कि उनकी सेना संख्या में मुगलों से बहुत छोटी है।
इसलिए उन्होंने ऐसी युद्ध नीति अपनाई जिसमें—
- गति
- गोपनीयता
- स्थानीय भूगोल
- पर्वतीय क्षेत्र
- अचानक हमला
- तेज वापसी
सबसे महत्वपूर्ण थे।
इसी रणनीति ने आगे चलकर गनिमी कावा (Guerrilla Warfare) को जन्म दिया।
गनिमी कावा (Guerrilla Warfare)
गनिमी कावा का अर्थ है—
छापामार युद्ध प्रणाली।
इसकी मुख्य विशेषताएँ
- अचानक हमला
- तेज गति
- कम समय में युद्ध
- शत्रु को भ्रमित करना
- जंगलों एवं पहाड़ियों का उपयोग
- कम सैनिकों से बड़ी सेना को हराना
इस नीति की सफलता के कारण
- दक्कन का कठिन भूगोल
- सैनिकों का स्थानीय ज्ञान
- तेज घुड़सवार सेना
- उत्कृष्ट गुप्तचर तंत्र
शिवाजी का गुप्तचर तंत्र
शिवाजी के प्रशासन में गुप्तचर व्यवस्था अत्यंत प्रभावी थी।
विशेषताएँ
- प्रत्येक क्षेत्र में सूचना संग्रह
- शत्रु की गतिविधियों की निगरानी
- सैनिक तैयारी की जानकारी
- संदेशों का तीव्र आदान-प्रदान
इसी कारण शिवाजी अक्सर शत्रुओं से एक कदम आगे रहते थे।
शिवाजी की प्रारम्भिक सफलताओं के कारण
नेतृत्व
उन्होंने सैनिकों में विश्वास उत्पन्न किया।
स्थानीय जनता का समर्थन
किसानों एवं ग्रामीणों ने सहयोग दिया।
पर्वतीय भूगोल
सह्याद्रि पर्वतमाला उनके लिए प्राकृतिक सुरक्षा कवच बनी।
अनुशासित सेना
उनकी सेना अत्यंत अनुशासित थी।
गनिमी कावा
यह उनकी सबसे बड़ी सैन्य शक्ति बनी।
परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य (Prelims Booster)
एक पंक्ति में याद रखें
- शिवाजी का जन्म — 19 फरवरी 1630
- जन्म स्थान — शिवनेरी दुर्ग
- माता — जीजाबाई
- पिता — शाहजी भोसले
- प्रथम प्रमुख विजय — तोरणा दुर्ग (1646)
- राजधानी — रायगढ़
- राज्याभिषेक — 6 जून 1674
- उपाधि — छत्रपति
- मृत्यु — 3 अप्रैल 1680
- प्रसिद्ध युद्ध नीति — गनिमी कावा (गुरिल्ला युद्ध)
UPSC एवं SSC के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
तथ्य 1
शिवाजी का उद्देश्य केवल क्षेत्रीय विस्तार नहीं था, बल्कि एक संगठित एवं उत्तरदायी शासन व्यवस्था स्थापित करना भी था।
तथ्य 2
उन्होंने स्थानीय भाषा मराठी तथा प्रशासनिक कार्यों में संस्कृत को भी प्रोत्साहन दिया।
तथ्य 3
शिवाजी धार्मिक रूप से सहिष्णु थे। उन्होंने मस्जिदों, सूफी संतों तथा विभिन्न धर्मों के लोगों का सम्मान किया और महिलाओं तथा धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के कठोर निर्देश दिए।
तथ्य 4
शिवाजी ने भारत की प्रारम्भिक संगठित नौसैनिक शक्ति विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सामान्य भ्रम (Exam Traps)
भ्रम 1
क्या समर्थ रामदास ही शिवाजी के एकमात्र गुरु थे?
उत्तर: नहीं। यह इतिहासकारों के बीच विवादित विषय है। परीक्षा में संतुलित उत्तर लिखें।
भ्रम 2
क्या हिन्दवी स्वराज्य का अर्थ केवल धार्मिक राज्य था?
उत्तर: नहीं। इसका व्यापक अर्थ स्वतंत्र, न्यायपूर्ण एवं जनकल्याणकारी शासन था।
भ्रम 3
क्या शिवाजी केवल एक योद्धा थे?
उत्तर: नहीं। वे कुशल प्रशासक, रणनीतिकार, नौसेना निर्माता और संगठनकर्ता भी थे।
भाग 1 का सार (Quick Revision)
- शिवाजी महाराज का जन्म 19 फरवरी 1630 को शिवनेरी दुर्ग में हुआ।
- उनके व्यक्तित्व निर्माण में जीजाबाई और दादोजी कोंडदेव की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
- उन्होंने हिन्दवी स्वराज्य की स्थापना का लक्ष्य अपनाया।
- 1646 में तोरणा दुर्ग पर अधिकार उनकी पहली बड़ी सफलता थी।
- गनिमी कावा उनकी प्रमुख सैन्य रणनीति थी।
- रायगढ़ आगे चलकर मराठा साम्राज्य की राजधानी बना।
- शिवाजी ने जनता-आधारित, न्यायपूर्ण और अनुशासित शासन की नींव रखी।
छत्रपति शिवाजी महाराज : भाग 2
इस भाग में अध्ययन करेंगे: अफजल खान प्रकरण, पन्हाला का घेराव, शाइस्ता खान पर आक्रमण, सूरत अभियान, पुरन्दर की संधि, आगरा की घटना, आगरा से पलायन, पुनः विजय अभियान, राज्याभिषेक तथा दक्षिणी अभियान।
शिवाजी महाराज और बीजापुर सल्तनत
शिवाजी की बढ़ती शक्ति से बीजापुर सल्तनत चिंतित हो गई। शिवाजी द्वारा एक-एक करके दुर्गों पर अधिकार करने और स्थानीय क्षेत्रों में अपना प्रभाव बढ़ाने से बीजापुर के सुल्तान अली आदिल शाह द्वितीय ने उन्हें रोकने का निर्णय लिया।
शिवाजी को समाप्त करने के लिए बीजापुर ने अपने सबसे शक्तिशाली सेनापति अफजल खान को विशाल सेना के साथ भेजा।
अफजल खान अभियान (1659)
पृष्ठभूमि
अफजल खान एक अनुभवी एवं शक्तिशाली सेनानायक था। उसे विश्वास था कि वह आसानी से शिवाजी को पराजित कर देगा।
मार्ग में उसने कई मंदिरों और धार्मिक स्थलों को क्षति पहुँचाई ताकि शिवाजी को खुले मैदान में युद्ध के लिए मजबूर किया जा सके।
लेकिन शिवाजी ने प्रत्यक्ष युद्ध से बचते हुए अपनी रणनीति अपनाई।
प्रतापगढ़ में भेंट
दोनों पक्षों के बीच प्रतापगढ़ दुर्ग के निकट मुलाकात तय हुई।
समझौते के अनुसार—
- दोनों कम सैनिकों के साथ आएँगे।
- दोनों बिना भारी हथियारों के मिलेंगे।
किन्तु दोनों पक्ष एक-दूसरे पर विश्वास नहीं कर रहे थे।
वाघनख (बाघनख) और बिछवा
शिवाजी ने सुरक्षा के लिए—
- लोहे का कवच पहना।
- सिर पर सुरक्षा टोपी धारण की।
- हाथ में वाघनख (Tiger Claws) छिपाया।
- कमर में बिछवा (कटार) रखा।
मुलाकात के दौरान अफजल खान ने शिवाजी पर आक्रमण करने का प्रयास किया।
तब शिवाजी ने वाघनख और बिछवा का उपयोग कर आत्मरक्षा की।
इसके बाद मराठा सेना ने बीजापुर सेना पर आक्रमण कर निर्णायक विजय प्राप्त की।
अफजल खान युद्ध का महत्व
- मराठा शक्ति की प्रतिष्ठा बढ़ी।
- शिवाजी का प्रभाव पूरे दक्कन में फैल गया।
- बड़ी संख्या में हथियार एवं धन प्राप्त हुआ।
- अनेक किले मराठों के अधीन आए।
- स्थानीय जनता का विश्वास और मजबूत हुआ।
परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य
वर्ष: 1659
स्थान: प्रतापगढ़
विरोधी: अफजल खान (बीजापुर)
परिणाम: शिवाजी की निर्णायक विजय
पन्हाला दुर्ग का घेराव (1660)
अफजल खान की मृत्यु के बाद बीजापुर ने पुनः शिवाजी के विरुद्ध अभियान चलाया।
इस बार सेनापति सिद्दी जौहर ने पन्हाला दुर्ग को घेर लिया।
कई महीनों तक शिवाजी दुर्ग में घिरे रहे।
पावनखिंड का युद्ध
दुर्ग से निकलने के दौरान शिवाजी की सुरक्षा के लिए बाजी प्रभु देशपांडे ने पावनखिंड में शत्रु सेना को रोके रखा।
उन्होंने अपने प्राणों का बलिदान देकर शिवाजी को सुरक्षित विशालगढ़ पहुँचने का अवसर दिया।
परीक्षा हेतु तथ्य
बाजी प्रभु देशपांडे का नाम प्रतियोगी परीक्षाओं में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
शिवाजी और मुगल साम्राज्य
दक्कन में शिवाजी की बढ़ती शक्ति से मुगल सम्राट औरंगज़ेब भी चिंतित हो गया।
उसने अपने मामा शाइस्ता खान को शिवाजी के विरुद्ध भेजा।
शाइस्ता खान पर आक्रमण (1663)
पृष्ठभूमि
शाइस्ता खान ने पुणे सहित अनेक क्षेत्रों पर अधिकार कर लिया।
वह लाल महल (पुणे) में रहने लगा, जो शिवाजी का बचपन का निवास था।
शिवाजी की योजना
रात्रि में विवाह समारोह का वेश धारण कर मराठा सैनिक पुणे में प्रवेश कर गए।
उन्होंने सीधे लाल महल पर आक्रमण किया।
परिणाम
- शाइस्ता खान घायल हुआ।
- उसकी उँगलियाँ कट गईं।
- उसका पुत्र मारा गया।
- मुगल सेना में भय फैल गया।
औरंगज़ेब ने शाइस्ता खान को बंगाल भेज दिया।
इस घटना का महत्व
- शिवाजी की साहसिक रणनीति विश्व प्रसिद्ध हुई।
- मुगलों की प्रतिष्ठा को भारी आघात पहुँचा।
- शिवाजी की लोकप्रियता बढ़ी।
प्रथम सूरत अभियान (1664)
सूरत क्यों महत्वपूर्ण था?
सूरत उस समय—
- भारत का प्रमुख व्यापारिक नगर
- मुगल साम्राज्य का समृद्ध बंदरगाह
- विदेशी व्यापार का प्रमुख केन्द्र
था।
अभियान
शिवाजी ने सूरत पर आक्रमण कर वहाँ से भारी धन प्राप्त किया।
उन्होंने केवल सरकारी एवं धनी व्यापारिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया।
महिलाओं, गरीबों तथा धार्मिक स्थलों को नुकसान न पहुँचाने के निर्देश दिए।
महत्व
- मराठा कोष समृद्ध हुआ।
- सेना को आर्थिक सहायता मिली।
- शिवाजी की आर्थिक शक्ति बढ़ी।
राजा जयसिंह का अभियान
सूरत अभियान के बाद औरंगज़ेब ने राजपूत सेनानायक मिर्जा राजा जयसिंह प्रथम को शिवाजी के विरुद्ध भेजा।
जयसिंह एक अत्यंत कुशल सेनापति था।
उसने मराठा दुर्गों पर व्यवस्थित अभियान चलाया।
पुरन्दर की संधि (1665)
संधि के पक्ष
- शिवाजी महाराज
- मिर्जा राजा जयसिंह
प्रमुख शर्तें
- शिवाजी ने 23 दुर्ग मुगलों को सौंपे।
- कुछ दुर्ग अपने पास रखे।
- शिवाजी ने मुगल सेवा स्वीकार करने पर सहमति दी।
- उनके पुत्र संभाजी को मुगल दरबार भेजा गया।
परीक्षा हेतु तथ्य
पुरन्दर की संधि – 1665
मुगल पक्ष – मिर्जा राजा जयसिंह
आगरा की घटना (1666)
पुरन्दर की संधि के बाद शिवाजी अपने पुत्र संभाजी के साथ आगरा पहुँचे।
उनका उद्देश्य औरंगज़ेब से मिलकर भविष्य की नीति तय करना था।
दरबार में अपमान
औरंगज़ेब ने शिवाजी को अपेक्षित सम्मान नहीं दिया।
उन्हें निम्न श्रेणी के सरदारों के साथ खड़ा किया गया।
इससे शिवाजी अत्यंत नाराज हुए।
नजरबंदी
दरबार छोड़ने के बाद शिवाजी को आगरा में नजरबंद कर दिया गया।
उनकी गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जाने लगी।
आगरा से पलायन
भारतीय इतिहास की सबसे प्रसिद्ध घटनाओं में से एक।
लोकप्रिय विवरण
शिवाजी ने बीमार होने का बहाना बनाया।
उन्होंने साधु-संतों को मिठाइयाँ एवं फल भेजने की अनुमति प्राप्त की।
धीरे-धीरे पहरेदारों की सतर्कता कम हुई।
फिर वे बड़े टोकरों/पेटियों में निकलकर आगरा से सुरक्षित बाहर आ गए।
परीक्षा टिप्पणी: आगरा से पलायन के विवरण के अनेक संस्करण मिलते हैं। UPSC के लिए यह जानना अधिक महत्वपूर्ण है कि 1666 में शिवाजी सफलतापूर्वक नजरबंदी से निकलकर दक्कन लौट आए।
आगरा से लौटने के बाद
दक्कन लौटने के बाद शिवाजी ने पुनः अपनी शक्ति संगठित की।
उन्होंने खोए हुए अधिकांश दुर्गों पर फिर से अधिकार कर लिया।
मराठा साम्राज्य पहले से अधिक शक्तिशाली बन गया।
द्वितीय सूरत अभियान (1670)
शिवाजी ने पुनः सूरत पर आक्रमण किया।
इस अभियान से मराठा राज्य की आर्थिक स्थिति और मजबूत हुई।
सिंहगढ़ विजय (1670)
पुरन्दर की संधि के बाद कोंढाणा दुर्ग मुगलों के पास चला गया था।
शिवाजी ने इसे पुनः जीतने का निर्णय लिया।
तानाजी मालुसरे
शिवाजी के विश्वसनीय सेनापति तानाजी मालुसरे ने कठिन पर्वतीय मार्ग से दुर्ग पर आक्रमण किया।
भीषण युद्ध में उनकी मृत्यु हो गई, लेकिन मराठों ने विजय प्राप्त की।
प्रसिद्ध कथन
तानाजी की मृत्यु पर शिवाजी ने कहा—
“गढ़ आया, पर सिंह चला गया।”
इसके बाद कोंढाणा दुर्ग का नाम सिंहगढ़ पड़ा।
शिवाजी का राज्याभिषेक (1674)
आवश्यकता
राज्याभिषेक के पीछे अनेक कारण थे—
- स्वतंत्र शासक के रूप में मान्यता
- वैधानिक शासन
- मराठा साम्राज्य की औपचारिक स्थापना
- प्रशासनिक स्थिरता
स्थान
रायगढ़ दुर्ग
तिथि
6 जून 1674 ई.
वैदिक अनुष्ठान
काशी के प्रसिद्ध विद्वान गागा भट्ट ने वैदिक रीति से राज्याभिषेक सम्पन्न कराया।
उपाधि
राज्याभिषेक के बाद शिवाजी ने “छत्रपति” की उपाधि धारण की।
राज्याभिषेक का महत्व
- मराठा साम्राज्य को वैधता मिली।
- हिन्दवी स्वराज्य का औपचारिक उदय हुआ।
- जनता का विश्वास बढ़ा।
- विदेशी शक्तियों ने उन्हें स्वतंत्र शासक के रूप में स्वीकार करना प्रारम्भ किया।
दक्षिणी अभियान (1676–1678)
राज्याभिषेक के बाद शिवाजी ने दक्षिण भारत की ओर अभियान चलाया।
उन्होंने—
- जिन्जी
- वेल्लोर
- तंजावुर क्षेत्र
में अपना प्रभाव बढ़ाया।
इन अभियानों से मराठा शक्ति का विस्तार दक्षिण भारत तक हुआ।
शिवाजी की युद्ध नीति की विशेषताएँ
आश्चर्य का तत्व
अचानक हमला कर शत्रु को भ्रमित करना।
तीव्र गति
तेज घुड़सवार सेना का उपयोग।
स्थानीय भूगोल का उपयोग
पर्वत, जंगल और घाटियों का लाभ उठाना।
सीमित संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग
छोटी सेना से बड़ी सेना को पराजित करना।
उत्कृष्ट गुप्तचर तंत्र
युद्ध से पहले शत्रु की सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करना।
कालक्रम (Chronology)
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 1659 | अफजल खान का वध एवं प्रतापगढ़ विजय |
| 1660 | पन्हाला का घेराव एवं पावनखिंड |
| 1663 | शाइस्ता खान पर आक्रमण |
| 1664 | प्रथम सूरत अभियान |
| 1665 | पुरन्दर की संधि |
| 1666 | आगरा की घटना एवं पलायन |
| 1670 | द्वितीय सूरत अभियान एवं सिंहगढ़ विजय |
| 1674 | रायगढ़ में राज्याभिषेक |
| 1676–78 | दक्षिणी अभियान |
UPSC एवं SSC के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण तथ्य
तथ्य 1
अफजल खान बीजापुर सल्तनत का सेनापति था, मुगल सेनापति नहीं।
तथ्य 2
शाइस्ता खान औरंगज़ेब का मामा था।
तथ्य 3
पुरन्दर की संधि मिर्जा राजा जयसिंह और शिवाजी के बीच हुई थी।
तथ्य 4
आगरा से पलायन भारतीय इतिहास की सर्वाधिक चर्चित रणनीतिक घटनाओं में गिना जाता है।
तथ्य 5
राज्याभिषेक के बाद शिवाजी केवल क्षेत्रीय सरदार नहीं, बल्कि विधिवत् स्वतंत्र सम्राट बने।
परीक्षा में पूछे जाने वाले सामान्य भ्रम
भ्रम 1
क्या अफजल खान मुगल सेनापति था?
उत्तर: नहीं, वह बीजापुर सल्तनत का सेनापति था।
भ्रम 2
क्या शाइस्ता खान बीजापुर का सेनापति था?
उत्तर: नहीं, वह मुगल साम्राज्य का सूबेदार और औरंगज़ेब का मामा था।
भ्रम 3
क्या पुरन्दर की संधि औरंगज़ेब तथा शिवाजी के बीच हुई थी?
उत्तर: नहीं, यह मिर्जा राजा जयसिंह और शिवाजी के बीच हुई थी।
भाग 2 का त्वरित पुनरावलोकन (Quick Revision)
- 1659 में प्रतापगढ़ पर शिवाजी ने अफजल खान को पराजित किया।
- 1660 में पन्हाला से निकलने में बाजी प्रभु देशपांडे का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
- 1663 में लाल महल, पुणे पर शाइस्ता खान पर साहसिक आक्रमण किया गया।
- 1664 और 1670 में सूरत पर अभियान चलाए गए।
- 1665 में पुरन्दर की संधि हुई।
- 1666 में आगरा से सफल पलायन ने शिवाजी की रणनीतिक प्रतिभा सिद्ध की।
- 1670 में सिंहगढ़ विजय में तानाजी मालुसरे ने वीरगति प्राप्त की।
- 6 जून 1674 को रायगढ़ में गागा भट्ट द्वारा वैदिक विधि से राज्याभिषेक सम्पन्न हुआ।
- राज्याभिषेक के बाद दक्षिण भारत में मराठा शक्ति का विस्तार किया गया।
छत्रपति शिवाजी महाराज : भाग 3
इस भाग में अध्ययन करेंगे: शिवाजी महाराज की प्रशासनिक व्यवस्था, अष्टप्रधान परिषद, राजस्व व्यवस्था, सैन्य संगठन, नौसेना, दुर्ग नीति, न्याय व्यवस्था, धार्मिक नीति, आर्थिक नीति, व्यापार, मुद्रा व्यवस्था तथा शासन प्रणाली।
शिवाजी महाराज की प्रशासनिक व्यवस्था (Administration of Shivaji)
शिवाजी महाराज केवल एक महान योद्धा ही नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी एवं कुशल प्रशासक भी थे। उन्होंने ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था विकसित की जो अनुशासन, जवाबदेही, न्याय और जनकल्याण पर आधारित थी।
उनकी प्रशासनिक प्रणाली पर प्राचीन भारतीय परंपराओं, स्थानीय मराठा शासन व्यवस्था तथा व्यावहारिक अनुभव का प्रभाव था।
प्रशासन की प्रमुख विशेषताएँ
- शक्तिशाली केन्द्रीय शासन
- योग्य अधिकारियों की नियुक्ति
- उत्तरदायी प्रशासन
- भ्रष्टाचार पर नियंत्रण
- किसानों के हितों की रक्षा
- धार्मिक सहिष्णुता
- अनुशासित सेना
- व्यवस्थित राजस्व प्रणाली
शिवाजी के शासन के मूल सिद्धांत
स्वराज्य
जनता के हित में स्वतंत्र शासन स्थापित करना।
सुशासन
ईमानदार, पारदर्शी एवं उत्तरदायी प्रशासन।
सुरक्षा
प्रजा, सीमाओं तथा व्यापार मार्गों की रक्षा।
न्याय
सभी नागरिकों के साथ निष्पक्ष व्यवहार।
धर्मनिरपेक्ष प्रशासन
सभी धर्मों का सम्मान।
शासन व्यवस्था की संरचना
छत्रपति │अष्टप्रधान परिषद │प्रांतीय अधिकारी │परगना अधिकारी │ग्राम अधिकारी
छत्रपति (राजा)
शासन का सर्वोच्च अधिकारी स्वयं छत्रपति होता था।
राजा के अधिकार—
- सेना का सर्वोच्च सेनापति
- न्याय का सर्वोच्च अधिकारी
- विदेश नीति का निर्धारण
- कर व्यवस्था की स्वीकृति
- मंत्रियों की नियुक्ति
- युद्ध एवं संधि का निर्णय
अष्टप्रधान परिषद (Council of Eight Ministers)
शिवाजी महाराज ने प्रशासन को सुचारु रूप से चलाने के लिए आठ प्रमुख मंत्रियों की परिषद बनाई, जिसे अष्टप्रधान परिषद कहा जाता है।
UPSC एवं SSC की दृष्टि से यह अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है।
अष्टप्रधान परिषद के सदस्य
| पद | कार्य |
|---|---|
| पेशवा | प्रधानमंत्री एवं प्रशासन का प्रमुख |
| अमात्य (मजूमदार) | वित्त एवं लेखा विभाग |
| सचिव (सचिव) | सरकारी अभिलेख एवं पत्राचार |
| मंत्री (वाकिया-नवीस) | गुप्तचर एवं दैनिक घटनाओं का लेखा |
| सुमंत (दबीर) | विदेश विभाग एवं कूटनीति |
| सेनापति | सेना का प्रमुख |
| न्यायाधीश (न्यायाधीश) | न्याय विभाग |
| पंडितराव | धर्म एवं दान विभाग |
अष्टप्रधान परिषद की विशेषताएँ
- सभी मंत्री राजा के प्रति उत्तरदायी थे।
- राजा अंतिम निर्णय लेने का अधिकार रखता था।
- मंत्री केवल सलाहकार नहीं, बल्कि प्रशासनिक अधिकारी भी थे।
- प्रत्येक विभाग का स्पष्ट कार्य विभाजन था।
अष्टप्रधान परिषद याद रखने की ट्रिक
“पे-अ-स-म-से-न्या-पं”
- पे = पेशवा
- अ = अमात्य
- स = सचिव
- म = मंत्री
- सु = सुमंत
- से = सेनापति
- न्या = न्यायाधीश
- पं = पंडितराव
प्रांतीय प्रशासन
शिवाजी ने राज्य को प्रशासनिक इकाइयों में विभाजित किया।
इनके अंतर्गत—
- प्रांत
- परगना
- गाँव
आते थे।
स्थानीय अधिकारियों की नियुक्ति योग्यता के आधार पर की जाती थी।
ग्राम प्रशासन
ग्राम प्रशासन भारतीय शासन व्यवस्था की सबसे छोटी इकाई था।
गाँव के प्रमुख अधिकारी—
- पाटिल
- कुलकर्णी
थे।
पाटिल
- कानून व्यवस्था
- प्रशासन
- कर संग्रह में सहयोग
कुलकर्णी
- भूमि अभिलेख
- राजस्व लेखा
- सरकारी रिकॉर्ड
राजस्व व्यवस्था (Revenue System)
शिवाजी की राजस्व प्रणाली किसानों के हितों को ध्यान में रखकर बनाई गई थी।
उन्होंने अनावश्यक करों को समाप्त करने का प्रयास किया।
भूमि मापन
भूमि का वैज्ञानिक ढंग से मापन कराया गया।
इससे कर निर्धारण अधिक न्यायपूर्ण हुआ।
कर निर्धारण
सामान्यतः कृषि उत्पादन का लगभग एक-तिहाई (1/3) भाग कर के रूप में लिया जाता था।
ध्यान दें: विभिन्न क्षेत्रों एवं परिस्थितियों के अनुसार इसमें परिवर्तन संभव था।
चौथ (Chauth)
चौथ क्या था?
चौथ ऐसा कर था जो मराठा राज्य के प्रत्यक्ष नियंत्रण से बाहर के क्षेत्रों से सुरक्षा एवं आक्रमण न करने के बदले लिया जाता था।
चौथ की दर
कुल आय का 25%
सरदेशमुखी (Sardeshmukhi)
सरदेशमुखी एक अतिरिक्त कर था।
दर
कुल आय का 10%
चौथ और सरदेशमुखी में अंतर
| चौथ | सरदेशमुखी |
|---|---|
| 25% कर | 10% कर |
| सुरक्षा कर | पारंपरिक अधिकार कर |
| बाहरी क्षेत्रों से | अतिरिक्त राजस्व |
परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य
चौथ = 25%
सरदेशमुखी = 10%
सैन्य संगठन (Military Administration)
शिवाजी की सेना अनुशासन, गति और संगठन के लिए प्रसिद्ध थी।
सेना के प्रमुख अंग
- पैदल सेना
- घुड़सवार सेना
- नौसेना
- दुर्ग सेना
- तोपखाना
घुड़सवार सेना
मराठा सेना की सबसे महत्वपूर्ण शक्ति घुड़सवार सेना थी।
विशेषताएँ—
- तेज गति
- अचानक हमला
- लंबी दूरी तक अभियान
- कम समय में वापसी
पैदल सेना
पर्वतीय क्षेत्रों में पैदल सेना का विशेष महत्व था।
इन सैनिकों को पहाड़ी युद्ध का अच्छा प्रशिक्षण दिया जाता था।
गनिमी कावा
गनिमी कावा शिवाजी की सबसे प्रसिद्ध युद्ध नीति थी।
मुख्य विशेषताएँ
- अचानक हमला
- तेज गति
- रात में अभियान
- जंगल एवं पहाड़ों का उपयोग
- छोटी सेना से बड़ी सेना को पराजित करना
शिवाजी की नौसेना (Navy)
भारतीय इतिहास में शिवाजी को आधुनिक संगठित नौसेना का प्रारम्भिक निर्माता माना जाता है।
नौसेना की आवश्यकता
- समुद्री व्यापार की सुरक्षा
- विदेशी शक्तियों पर नियंत्रण
- तटीय क्षेत्रों की रक्षा
- समुद्री डकैती रोकना
प्रमुख नौसैनिक अड्डे
- विजयदुर्ग
- सिंधुदुर्ग
- सुवर्णदुर्ग
- कोलाबा
सिंधुदुर्ग किला
सिंधुदुर्ग किला शिवाजी की समुद्री सुरक्षा नीति का महत्वपूर्ण भाग था।
इसका निर्माण समुद्री रक्षा के लिए कराया गया।
दुर्ग नीति (Fort Policy)
शिवाजी को “दुर्गों का स्वामी” भी कहा जाता है।
उन्होंने दुर्गों को प्रशासन और सुरक्षा का आधार बनाया।
दुर्गों के प्रकार
पर्वतीय दुर्ग
उदाहरण—
- रायगढ़
- प्रतापगढ़
- सिंहगढ़
समुद्री दुर्ग
उदाहरण—
- सिंधुदुर्ग
- विजयदुर्ग
मैदानी दुर्ग
समतल क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए।
दुर्गों का महत्व
- प्रशासनिक केन्द्र
- सैन्य सुरक्षा
- शस्त्रागार
- खजाना
- खाद्यान्न भंडारण
न्याय व्यवस्था
शिवाजी निष्पक्ष न्याय में विश्वास रखते थे।
प्रमुख विशेषताएँ
- त्वरित न्याय
- भ्रष्टाचार पर कठोर दंड
- महिलाओं की सुरक्षा
- गरीबों के साथ न्याय
- धार्मिक भेदभाव का अभाव
महिलाओं के प्रति नीति
यह UPSC तथा SSC दोनों के लिए महत्वपूर्ण विषय है।
प्रमुख बातें
- महिलाओं के सम्मान की रक्षा
- युद्ध में महिलाओं को नुकसान पहुँचाने पर कठोर दंड
- महिलाओं का अपमान करने वाले सैनिकों को दंडित किया जाता था।
धार्मिक नीति
शिवाजी धार्मिक रूप से उदार शासक थे।
उन्होंने सभी धर्मों का सम्मान किया।
धार्मिक नीति की विशेषताएँ
- मंदिरों की रक्षा
- मस्जिदों का सम्मान
- सूफी संतों का आदर
- जबरन धर्म परिवर्तन का विरोध
- धार्मिक स्वतंत्रता
क्या शिवाजी धार्मिक कट्टर थे?
नहीं।
उन्होंने अनेक मुस्लिम अधिकारियों को उच्च पदों पर नियुक्त किया।
उदाहरण—
- दौलत खान
- इब्राहिम खान
- सिद्दी हिलाल (कुछ अभियानों में सहयोगी)
उन्होंने मस्जिदों और कुरान का अपमान न करने के निर्देश भी दिए।
आर्थिक नीति
शिवाजी ने व्यापार और कृषि दोनों को महत्व दिया।
आर्थिक सुधार
- व्यापार को प्रोत्साहन
- कृषि संरक्षण
- सिंचाई पर ध्यान
- बंदरगाहों का विकास
- राजस्व सुधार
व्यापार
शिवाजी के समय व्यापार के प्रमुख केन्द्र—
- सूरत
- राजापुर
- चौल
- दाभोल
थे।
विदेशी व्यापार
शिवाजी के समय संपर्क रखने वाली प्रमुख विदेशी शक्तियाँ—
- अंग्रेज
- पुर्तगाली
- डच
- फ्रांसीसी
मुद्रा व्यवस्था
शिवाजी ने अपनी मुद्रा भी जारी करवाई।
प्रमुख सिक्के
स्वर्ण मुद्रा
- होन (Hon)
ताम्र मुद्रा
- शिवराई (Shivrai)
भाषा नीति
शिवाजी ने प्रशासन में स्थानीय भाषा मराठी को बढ़ावा दिया।
संस्कृत को भी सम्मानजनक स्थान दिया गया।
गुप्तचर व्यवस्था
शिवाजी की गुप्तचर प्रणाली अत्यंत विकसित थी।
विशेषताएँ
- प्रत्येक क्षेत्र में सूचना तंत्र
- दुश्मन की गतिविधियों पर निगरानी
- गुप्त संदेश प्रणाली
- तीव्र संचार
UPSC एवं SSC के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
तथ्य 1
शिवाजी का प्रशासन अत्यधिक केंद्रीकृत था, लेकिन स्थानीय अधिकारियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण थी।
तथ्य 2
अष्टप्रधान परिषद के सभी सदस्य राजा के प्रति उत्तरदायी थे।
तथ्य 3
भारतीय नौसेना के प्रारम्भिक संगठित विकास का श्रेय शिवाजी को दिया जाता है।
तथ्य 4
दुर्ग शिवाजी की रक्षा नीति की रीढ़ थे।
तथ्य 5
महिलाओं एवं धार्मिक स्थलों की सुरक्षा शिवाजी की सैन्य आचार संहिता का महत्वपूर्ण भाग थी।
परीक्षा में पूछे जाने वाले सामान्य भ्रम
भ्रम 1
क्या पेशवा शिवाजी के समय सबसे शक्तिशाली शासक था?
उत्तर: नहीं। शिवाजी के समय अंतिम निर्णय का अधिकार छत्रपति के पास था। बाद के काल में पेशवाओं की शक्ति बढ़ी।
भ्रम 2
क्या चौथ और सरदेशमुखी एक ही कर थे?
उत्तर: नहीं।
- चौथ = 25%
- सरदेशमुखी = 10%
भ्रम 3
क्या अष्टप्रधान परिषद आधुनिक मंत्रिमंडल की तरह स्वतंत्र थी?
उत्तर: नहीं। यह परिषद छत्रपति की सहायता करती थी, परंतु अंतिम निर्णय राजा का होता था।
त्वरित पुनरावलोकन (Quick Revision)
- शिवाजी का शासन केंद्रीकृत एवं उत्तरदायी था।
- अष्टप्रधान परिषद में आठ मंत्री शामिल थे।
- चौथ 25% तथा सरदेशमुखी 10% कर थे।
- घुड़सवार सेना और गनिमी कावा मराठा सैन्य शक्ति की आधारशिला थे।
- शिवाजी ने संगठित नौसेना का विकास किया और सिंधुदुर्ग जैसे समुद्री किलों का निर्माण कराया।
- दुर्ग प्रशासन, सुरक्षा और सैन्य रणनीति के केंद्र थे।
- महिलाओं, धार्मिक स्थलों और आम जनता की सुरक्षा को विशेष महत्व दिया गया।
- स्थानीय भाषा मराठी तथा संस्कृत को प्रशासनिक और सांस्कृतिक संरक्षण मिला।
छत्रपति शिवाजी महाराज : भाग 4
इस भाग में अध्ययन करेंगे: शिवाजी महाराज के उत्तराधिकारी, प्रमुख ऐतिहासिक स्रोत, इतिहासकारों की राय, शिवाजी का व्यक्तित्व एवं विरासत, महत्वपूर्ण तिथियाँ, कालक्रम (Timeline), परीक्षा हेतु तथ्य, वन-लाइनर, Revision Notes तथा UPSC/SSC दृष्टिकोण।
शिवाजी महाराज के अंतिम वर्ष
राज्याभिषेक (1674) के बाद शिवाजी महाराज ने अपने साम्राज्य के विस्तार, प्रशासन को सुदृढ़ बनाने तथा दक्षिण भारत में मराठा प्रभाव बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया।
उन्होंने कर्नाटक क्षेत्र में कई सफल अभियान चलाए तथा जिन्जी (Gingee), वेल्लोर तथा तंजावुर क्षेत्र तक अपना प्रभाव स्थापित किया।
इसी अवधि में उन्होंने समुद्री सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाया तथा पश्चिमी तट पर विदेशी शक्तियों की गतिविधियों पर निगरानी रखी।
शिवाजी महाराज की मृत्यु
| विषय | विवरण |
|---|---|
| तिथि | 3 अप्रैल 1680 ई. |
| स्थान | रायगढ़ दुर्ग |
| आयु | लगभग 50 वर्ष |
मृत्यु के कारणों के विषय में विभिन्न मत हैं, परंतु अधिकांश इतिहासकार इसे बीमारी से हुई प्राकृतिक मृत्यु मानते हैं।
शिवाजी के उत्तराधिकारी (Successors)
शिवाजी की मृत्यु के बाद मराठा साम्राज्य में उत्तराधिकार का प्रश्न उत्पन्न हुआ।
संभाजी महाराज (1681–1689)
शिवाजी के ज्येष्ठ पुत्र संभाजी महाराज ने मराठा साम्राज्य की बागडोर संभाली।
उन्होंने औरंगज़ेब के विरुद्ध संघर्ष जारी रखा।
1689 ई. में मुगलों ने उन्हें बंदी बना लिया और अत्यंत क्रूरता के साथ उनकी हत्या कर दी।
परीक्षा तथ्य: संभाजी ने इस्लाम स्वीकार करने से इंकार किया था।
राजाराम महाराज
संभाजी की मृत्यु के बाद उनके छोटे भाई राजाराम शासक बने।
उन्होंने जिन्जी (तमिलनाडु) को अपना प्रमुख सैन्य केन्द्र बनाया और वहीं से मुगलों के विरुद्ध संघर्ष जारी रखा।
महारानी ताराबाई
राजाराम की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी महारानी ताराबाई ने मराठा साम्राज्य का नेतृत्व किया।
उन्होंने औरंगज़ेब के विरुद्ध मराठा प्रतिरोध को जीवित रखा।
UPSC तथ्य: मराठा साम्राज्य को बचाने में ताराबाई की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
शिवाजी के बाद मराठा साम्राज्य का विस्तार
शिवाजी द्वारा स्थापित मराठा शक्ति बाद में भारत की सबसे प्रभावशाली राजनीतिक शक्तियों में से एक बन गई।
18वीं शताब्दी में मराठों का प्रभाव—
- दिल्ली
- मालवा
- गुजरात
- बुंदेलखंड
- राजस्थान
- उड़ीसा
- पंजाब के कुछ क्षेत्रों
तक पहुँच गया।
पेशवाओं का उदय
शिवाजी के समय पेशवा केवल प्रधानमंत्री होता था।
बाद में—
- बालाजी विश्वनाथ
- बाजीराव प्रथम
- नाना साहेब
जैसे पेशवाओं के समय वास्तविक राजनीतिक शक्ति पेशवाओं के हाथों में आ गई।
SSC में बार-बार पूछा जाता है।
शिवाजी महाराज का व्यक्तित्व
शिवाजी अनेक गुणों से सम्पन्न शासक थे।
महान योद्धा
उन्होंने सीमित संसाधनों में शक्तिशाली साम्राज्यों को चुनौती दी।
कुशल प्रशासक
उन्होंने उत्तरदायी एवं अनुशासित प्रशासन विकसित किया।
राष्ट्रनिर्माता
उन्होंने हिन्दवी स्वराज्य की अवधारणा को व्यवहार में उतारा।
रणनीतिकार
उनकी गुरिल्ला युद्ध नीति आज भी सैन्य शिक्षा का महत्वपूर्ण विषय है।
धार्मिक सहिष्णु
उन्होंने सभी धर्मों के लोगों के साथ न्यायपूर्ण व्यवहार किया।
जनता के हितैषी
उन्होंने किसानों, महिलाओं तथा व्यापारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की।
शिवाजी महाराज की प्रमुख उपलब्धियाँ
राजनीतिक
- स्वतंत्र मराठा राज्य की स्थापना
- हिन्दवी स्वराज्य की अवधारणा
प्रशासनिक
- अष्टप्रधान परिषद
- व्यवस्थित प्रशासन
- न्यायपूर्ण शासन
सैन्य
- गनिमी कावा
- दुर्ग नीति
- संगठित सेना
नौसैनिक
- भारतीय नौसेना के प्रारम्भिक विकास में योगदान
- समुद्री किलों का निर्माण
आर्थिक
- राजस्व सुधार
- व्यापार को प्रोत्साहन
प्रमुख ऐतिहासिक स्रोत (Historical Sources)
UPSC तथा SSC दोनों में यह विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है।
समकालीन मराठी स्रोत
सभासद बखर
लेखक — कृष्णाजी अनंत सभासद
यह शिवाजी के जीवन पर आधारित सबसे महत्वपूर्ण प्रारम्भिक स्रोतों में से एक है।
चिटणीस बखर
मराठा इतिहास का महत्वपूर्ण स्रोत।
९१ कलमी बखर
मराठा इतिहास से संबंधित प्रमुख बखर साहित्य।
संस्कृत स्रोत
शिवभारत
लेखक — कविन्द्र परमानंद
यह शिवाजी के जीवन एवं उपलब्धियों का महत्वपूर्ण संस्कृत ग्रंथ है।
फारसी स्रोत
- मासिर-ए-आलमगीरी
- आलमगीरनामा
- मुगल अभिलेख
इनसे मुगल दृष्टिकोण प्राप्त होता है।
यूरोपीय स्रोत
- अंग्रेज यात्रियों के विवरण
- पुर्तगाली अभिलेख
- डच व्यापारिक अभिलेख
- फ्रांसीसी यात्रियों के वृत्तांत
इतिहासकारों की राय
जदुनाथ सरकार
उन्होंने शिवाजी को भारत के महानतम सैन्य नेताओं में स्थान दिया।
जी. एस. सरदेसाई
उन्होंने शिवाजी को आधुनिक मराठा राज्य का निर्माता माना।
स्टुअर्ट गॉर्डन
उन्होंने शिवाजी को क्षेत्रीय शक्ति से राष्ट्रीय शक्ति के निर्माण का आधार बताया।
सतीश चंद्र
उन्होंने शिवाजी की प्रशासनिक क्षमता एवं संगठन कौशल को विशेष महत्व दिया।
शिवाजी की विरासत (Legacy)
आज शिवाजी केवल महाराष्ट्र के नायक नहीं, बल्कि सम्पूर्ण भारत के महान राष्ट्रनिर्माताओं में गिने जाते हैं।
उनकी विरासत—
- राष्ट्रभक्ति
- सुशासन
- संगठन
- साहस
- आत्मनिर्भरता
- जनकल्याण
की प्रेरणा देती है।
शिवाजी महाराज की महत्वपूर्ण तिथियाँ
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 1630 | जन्म |
| 1646 | तोरणा दुर्ग विजय |
| 1659 | अफजल खान प्रकरण |
| 1663 | शाइस्ता खान पर आक्रमण |
| 1664 | प्रथम सूरत अभियान |
| 1665 | पुरन्दर की संधि |
| 1666 | आगरा की घटना एवं पलायन |
| 1670 | सिंहगढ़ विजय एवं द्वितीय सूरत अभियान |
| 1674 | राज्याभिषेक |
| 1676–78 | दक्षिण भारत अभियान |
| 1680 | मृत्यु |
शिवाजी महाराज का कालक्रम (Timeline)
1630 : जन्म│1646 : तोरणा विजय│1659 : अफजल खान│1663 : शाइस्ता खान│1664 : सूरत अभियान│1665 : पुरन्दर संधि│1666 : आगरा से पलायन│1670 : सिंहगढ़ विजय│1674 : राज्याभिषेक│1676 : दक्षिणी अभियान│1680 : मृत्यु

शिवाजी महाराज के प्रसिद्ध कथन
“स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है।”
महत्वपूर्ण परीक्षा तथ्य: यह कथन लोकप्रिय रूप से शिवाजी महाराज से जोड़ा जाता है, किंतु ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित समकालीन स्रोतों में यह वाक्य उपलब्ध नहीं है। आधुनिक भारत में “स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा” का प्रसिद्ध नारा लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक से संबंधित है। अतः प्रतियोगी परीक्षाओं में इस भेद को समझना आवश्यक है।
UPSC एवं SSC के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण तथ्य
तथ्य 1
शिवाजी ने मराठा शक्ति को संगठित कर स्वतंत्र राज्य की स्थापना की।
तथ्य 2
उन्होंने धार्मिक सहिष्णुता की नीति अपनाई।
तथ्य 3
उनकी सेना अनुशासन और गति के लिए प्रसिद्ध थी।
तथ्य 4
उन्होंने संगठित नौसेना विकसित की।
तथ्य 5
उनकी प्रशासनिक व्यवस्था अत्यंत उत्तरदायी थी।
तथ्य 6
दुर्ग उनकी सैन्य रणनीति का प्रमुख आधार थे।
तथ्य 7
अष्टप्रधान परिषद उनके प्रशासन की मुख्य संस्था थी।
तथ्य 8
शिवाजी ने महिलाओं एवं धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए कठोर नियम बनाए।
UPSC Mains (GS-I) के लिए विश्लेषणात्मक बिंदु
शिवाजी क्यों सफल हुए?
- प्रभावी नेतृत्व
- स्थानीय जनता का समर्थन
- भूगोल का उत्कृष्ट उपयोग
- गुरिल्ला युद्ध नीति
- मजबूत गुप्तचर तंत्र
- अनुशासित सेना
- कुशल प्रशासन
- स्पष्ट राजनीतिक उद्देश्य
परीक्षा में पूछे जाने वाले सामान्य भ्रम
भ्रम 1
क्या शिवाजी ने केवल मुगलों से युद्ध किया?
उत्तर: नहीं। उन्होंने बीजापुर, मुगलों, सिद्दियों तथा आवश्यकता पड़ने पर अन्य शक्तियों का भी सामना किया।
भ्रम 2
क्या शिवाजी धार्मिक असहिष्णु थे?
उत्तर: नहीं। अधिकांश ऐतिहासिक स्रोत उन्हें धार्मिक रूप से सहिष्णु शासक बताते हैं।
भ्रम 3
क्या पेशवा शिवाजी के समय वास्तविक शासक था?
उत्तर: नहीं। शिवाजी के समय सर्वोच्च अधिकार छत्रपति के पास था।
परीक्षा हेतु 50 महत्वपूर्ण वन-लाइनर (One-Liners)
- शिवाजी का जन्म शिवनेरी दुर्ग में हुआ।
- उनके पिता शाहजी भोसले थे।
- माता जीजाबाई थीं।
- प्रथम प्रमुख विजय तोरणा दुर्ग थी।
- प्रतापगढ़ युद्ध 1659 में हुआ।
- अफजल खान बीजापुर का सेनापति था।
- शाइस्ता खान औरंगज़ेब का मामा था।
- लाल महल पुणे में स्थित है।
- प्रथम सूरत अभियान 1664 में हुआ।
- पुरन्दर की संधि 1665 में हुई।
- संधि मिर्जा राजा जयसिंह से हुई।
- आगरा की घटना 1666 की है।
- राज्याभिषेक 6 जून 1674 को हुआ।
- राज्याभिषेक रायगढ़ में हुआ।
- गागा भट्ट ने राज्याभिषेक कराया।
- उपाधि – छत्रपति।
- राजधानी – रायगढ़।
- गनिमी कावा गुरिल्ला युद्ध नीति है।
- चौथ 25% कर था।
- सरदेशमुखी 10% कर था।
- अष्टप्रधान परिषद में आठ मंत्री थे।
- पेशवा प्रधानमंत्री था।
- अमात्य वित्त मंत्री था।
- सुमंत विदेश मंत्री था।
- पंडितराव धर्म विभाग का प्रमुख था।
- न्यायाधीश न्याय विभाग का प्रमुख था।
- शिवाजी ने नौसेना विकसित की।
- सिंधुदुर्ग समुद्री किला है।
- विजयदुर्ग नौसैनिक अड्डा था।
- पाटिल ग्राम अधिकारी था।
- कुलकर्णी लेखा अधिकारी था।
- बाजी प्रभु देशपांडे पावनखिंड के नायक थे।
- तानाजी मालुसरे सिंहगढ़ के नायक थे।
- संभाजी शिवाजी के ज्येष्ठ पुत्र थे।
- ताराबाई मराठा इतिहास की वीरांगना थीं।
- राजाराम जिन्जी गए।
- सभासद बखर महत्वपूर्ण स्रोत है।
- शिवभारत संस्कृत ग्रंथ है।
- कविन्द्र परमानंद ने शिवभारत लिखा।
- जदुनाथ सरकार ने शिवाजी पर महत्वपूर्ण कार्य किया।
- शिवाजी ने किसानों को संरक्षण दिया।
- उन्होंने महिलाओं के सम्मान की रक्षा की।
- उन्होंने धार्मिक स्थलों की सुरक्षा की।
- मराठी को प्रशासनिक भाषा का स्थान मिला।
- संस्कृत को भी संरक्षण मिला।
- शिवाजी का निधन 1680 में हुआ।
- रायगढ़ उनका अंतिम निवास था।
- हिन्दवी स्वराज्य उनकी राजनीतिक अवधारणा थी।
- मराठा साम्राज्य की नींव शिवाजी ने रखी।
- शिवाजी भारतीय इतिहास के महान राष्ट्रनिर्माताओं में गिने जाते हैं।
सम्पूर्ण नोट्स का सार (Master Revision)
यदि परीक्षा से पहले केवल पाँच बातें याद रखनी हों, तो ये याद रखें—
- हिन्दवी स्वराज्य – शिवाजी की मूल राजनीतिक अवधारणा।
- गनिमी कावा – उनकी प्रसिद्ध गुरिल्ला युद्ध नीति।
- अष्टप्रधान परिषद – प्रशासन का प्रमुख आधार।
- राज्याभिषेक (6 जून 1674, रायगढ़) – मराठा राज्य की औपचारिक स्थापना।
- धार्मिक सहिष्णुता, सुशासन और संगठित सेना – शिवाजी के शासन की सबसे बड़ी विशेषताएँ।
छत्रपति शिवाजी महाराज : भाग 5 – अभ्यास प्रश्न
निर्देश: प्रत्येक प्रश्न के बाद सही उत्तर एवं संक्षिप्त व्याख्या दी गई है। ये प्रश्न UPSC, SSC, State PSC, Railway तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
प्रश्न 1 : शिवाजी महाराज का जन्म कहाँ हुआ था?
A. रायगढ़
B. प्रतापगढ़
C. शिवनेरी दुर्ग
D. सिंहगढ़
उत्तर: ✅ C
व्याख्या: शिवाजी महाराज का जन्म 19 फरवरी 1630 ई. को महाराष्ट्र के शिवनेरी दुर्ग में हुआ था।
प्रश्न 2 : शिवाजी महाराज के पिता कौन थे?
A. मालोजी भोसले
B. शाहजी भोसले
C. संभाजी
D. राजाराम
उत्तर: ✅ B
व्याख्या: शिवाजी के पिता शाहजी राजे भोसले बीजापुर सल्तनत के एक प्रमुख मराठा सरदार एवं सेनानायक थे।
प्रश्न 3 : शिवाजी महाराज की माता कौन थीं?
A. सईबाई
B. ताराबाई
C. जीजाबाई
D. सोयराबाई
उत्तर: ✅ C
व्याख्या: राजमाता जीजाबाई ने शिवाजी के व्यक्तित्व, राष्ट्रभक्ति और स्वराज्य की भावना के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रश्न 4 : शिवाजी महाराज की पहली प्रमुख विजय कौन-सी मानी जाती है?
A. प्रतापगढ़
B. रायगढ़
C. तोरणा दुर्ग
D. सिंहगढ़
उत्तर: ✅ C
व्याख्या: वर्ष 1646 में तोरणा दुर्ग पर अधिकार शिवाजी की पहली महत्वपूर्ण विजय मानी जाती है।
प्रश्न 5 : ‘हिन्दवी स्वराज्य’ का मुख्य उद्देश्य क्या था?
A. धार्मिक साम्राज्य की स्थापना
B. व्यापार का विस्तार
C. स्वतंत्र एवं न्यायपूर्ण शासन की स्थापना
D. मुगल साम्राज्य में उच्च पद प्राप्त करना
उत्तर: ✅ C
व्याख्या: हिन्दवी स्वराज्य का उद्देश्य जनता के हित में स्वतंत्र, न्यायपूर्ण एवं उत्तरदायी शासन स्थापित करना था।
प्रश्न 6 : शिवाजी महाराज के प्रशासनिक एवं सैनिक प्रशिक्षण में किसका महत्वपूर्ण योगदान था?
A. समर्थ रामदास
B. दादोजी कोंडदेव
C. तानाजी मालुसरे
D. बाजी प्रभु देशपांडे
उत्तर: ✅ B
व्याख्या: दादोजी कोंडदेव ने शिवाजी को प्रशासन, घुड़सवारी, शस्त्र संचालन तथा राज्य प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया।
प्रश्न 7 : अफजल खान किस राज्य का सेनापति था?
A. मुगल साम्राज्य
B. गोलकुंडा
C. बीजापुर
D. अहमदनगर
उत्तर: ✅ C
व्याख्या: अफजल खान बीजापुर सल्तनत का शक्तिशाली सेनापति था, जिसे शिवाजी को पराजित करने भेजा गया था।
प्रश्न 8 : अफजल खान प्रकरण किस वर्ष हुआ?
A. 1646
B. 1650
C. 1659
D. 1665
उत्तर: ✅ C
व्याख्या: प्रतापगढ़ में 1659 ई. में शिवाजी और अफजल खान की ऐतिहासिक भेंट हुई।
प्रश्न 9 : शिवाजी महाराज ने आत्मरक्षा के लिए कौन-सा विशेष हथियार प्रयोग किया?
A. तलवार
B. भाला
C. वाघनख (बाघनख)
D. चक्र
उत्तर: ✅ C
व्याख्या: शिवाजी ने अफजल खान से भेंट के समय छिपे हुए वाघनख एवं बिछवा का उपयोग किया।
प्रश्न 10 : अफजल खान की मृत्यु किस स्थान के निकट हुई?
A. रायगढ़
B. प्रतापगढ़
C. पन्हाला
D. पुरंदर
उत्तर: ✅ B
व्याख्या: अफजल खान की मृत्यु प्रतापगढ़ दुर्ग के निकट हुई थी।
प्रश्न 11 : पावनखिंड के वीर नायक कौन थे?
A. तानाजी मालुसरे
B. बाजी प्रभु देशपांडे
C. नेताजी पालकर
D. मुरारबाजी देशपांडे
उत्तर: ✅ B
व्याख्या: बाजी प्रभु देशपांडे ने पावनखिंड में वीरतापूर्वक युद्ध करते हुए शिवाजी को सुरक्षित निकलने का अवसर दिया।
प्रश्न 12 : शाइस्ता खान किस मुगल सम्राट का मामा था?
A. बाबर
B. शाहजहाँ
C. औरंगज़ेब
D. जहाँगीर
उत्तर: ✅ C
व्याख्या: शाइस्ता खान, औरंगज़ेब का मामा तथा दक्कन का मुगल सूबेदार था।
प्रश्न 13 : शिवाजी महाराज ने शाइस्ता खान पर आक्रमण कहाँ किया?
A. दिल्ली
B. आगरा
C. लाल महल, पुणे
D. रायगढ़
उत्तर: ✅ C
व्याख्या: वर्ष 1663 में शिवाजी ने पुणे स्थित लाल महल में शाइस्ता खान पर साहसिक रात्रि आक्रमण किया।
प्रश्न 14 : प्रथम सूरत अभियान कब हुआ?
A. 1662
B. 1663
C. 1664
D. 1666
उत्तर: ✅ C
व्याख्या: शिवाजी ने 1664 में सूरत पर आक्रमण कर वहाँ से बड़ी मात्रा में धन प्राप्त किया।
प्रश्न 15 : पुरन्दर की संधि किसके बीच हुई?
A. औरंगज़ेब एवं शिवाजी
B. मिर्जा राजा जयसिंह एवं शिवाजी
C. शाहजहाँ एवं शिवाजी
D. शाहजी एवं जयसिंह
उत्तर: ✅ B
व्याख्या: 1665 में पुरन्दर की संधि मिर्जा राजा जयसिंह प्रथम और शिवाजी के बीच हुई थी।
प्रश्न 16 : पुरन्दर की संधि किस वर्ष हुई?
A. 1663
B. 1664
C. 1665
D. 1666
उत्तर: ✅ C
व्याख्या: पुरन्दर की संधि 1665 ई. में संपन्न हुई थी।
प्रश्न 17 : शिवाजी महाराज आगरा किस मुगल सम्राट से मिलने गए थे?
A. शाहजहाँ
B. औरंगज़ेब
C. जहाँगीर
D. बहादुर शाह प्रथम
उत्तर: ✅ B
व्याख्या: पुरन्दर की संधि के बाद शिवाजी 1666 में औरंगज़ेब से मिलने आगरा गए थे।
प्रश्न 18 : शिवाजी महाराज आगरा से कब सफलतापूर्वक निकले?
A. 1664
B. 1665
C. 1666
D. 1668
उत्तर: ✅ C
व्याख्या: आगरा में नजरबंद किए जाने के बाद शिवाजी 1666 ई. में सफलतापूर्वक निकल गए।
प्रश्न 19 : सिंहगढ़ विजय के नायक कौन थे?
A. बाजी प्रभु देशपांडे
B. तानाजी मालुसरे
C. मुरारबाजी
D. प्रतापराव गुजर
उत्तर: ✅ B
व्याख्या: तानाजी मालुसरे ने 1670 में सिंहगढ़ विजय में वीरगति प्राप्त की।
प्रश्न 20 : “गढ़ आया, पर सिंह चला गया” यह प्रसिद्ध कथन किसके लिए कहा गया?
A. संभाजी
B. बाजी प्रभु
C. तानाजी मालुसरे
D. शाहजी
उत्तर: ✅ C
व्याख्या: तानाजी की वीरगति के बाद शिवाजी ने कहा— “गढ़ आया, पर सिंह चला गया।”
प्रश्न 21 : शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक कहाँ हुआ?
A. प्रतापगढ़
B. रायगढ़
C. तोरणा
D. शिवनेरी
उत्तर: ✅ B
व्याख्या: शिवाजी का भव्य राज्याभिषेक रायगढ़ दुर्ग में हुआ था।
प्रश्न 22 : शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक कब हुआ?
A. 1670
B. 1672
C. 1674
D. 1680
उत्तर: ✅ C
व्याख्या: शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक 6 जून 1674 ई. को सम्पन्न हुआ।
प्रश्न 23 : शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक किस विद्वान ने सम्पन्न कराया?
A. समर्थ रामदास
B. गागा भट्ट
C. कविन्द्र परमानंद
D. नीलकंठ भट्ट
उत्तर: ✅ B
व्याख्या: काशी के विद्वान गागा भट्ट ने वैदिक विधि से शिवाजी का राज्याभिषेक कराया।
प्रश्न 24 : राज्याभिषेक के बाद शिवाजी ने कौन-सी उपाधि धारण की?
A. महाराजाधिराज
B. सम्राट
C. छत्रपति
D. विक्रमादित्य
उत्तर: ✅ C
व्याख्या: राज्याभिषेक के बाद शिवाजी ने “छत्रपति” की उपाधि धारण की, जिससे वे स्वतंत्र एवं सार्वभौम शासक के रूप में स्थापित हुए।
प्रश्न 25 : निम्नलिखित में से कौन-सा कथन शिवाजी महाराज के संबंध में सही है?
A. उन्होंने केवल मैदानी युद्धों पर बल दिया।
B. उन्होंने संगठित नौसेना की उपेक्षा की।
C. उन्होंने गनिमी कावा (गुरिल्ला युद्ध) की प्रभावी रणनीति अपनाई।
D. उन्होंने दुर्गों का उपयोग नहीं किया।
उत्तर: ✅ C
व्याख्या: शिवाजी की सबसे बड़ी सैन्य विशेषता गनिमी कावा (Guerrilla Warfare) थी। उन्होंने पर्वतीय भूगोल, तेज गति, गुप्तचर तंत्र और अचानक आक्रमण की रणनीति अपनाकर बड़ी सेनाओं को भी पराजित किया।
प्रश्न 26 : शिवाजी महाराज की अष्टप्रधान परिषद में प्रधानमंत्री को क्या कहा जाता था?
A. अमात्य
B. सुमंत
C. पेशवा
D. सचिव
उत्तर: ✅ C
व्याख्या: अष्टप्रधान परिषद में पेशवा प्रधानमंत्री एवं प्रशासन का प्रमुख अधिकारी होता था। शिवाजी के समय वह छत्रपति के अधीन कार्य करता था।
प्रश्न 27 : अष्टप्रधान परिषद में वित्त विभाग का प्रमुख कौन था?
A. सचिव
B. अमात्य
C. पंडितराव
D. सेनापति
उत्तर: ✅ B
व्याख्या: अमात्य (मजूमदार) राज्य के आय-व्यय, लेखा एवं वित्त विभाग का प्रमुख अधिकारी था।
प्रश्न 28 : विदेश विभाग का प्रमुख किसे कहा जाता था?
A. मंत्री
B. सचिव
C. सुमंत (दबीर)
D. न्यायाधीश
उत्तर: ✅ C
व्याख्या: सुमंत (दबीर) विदेश नीति, कूटनीतिक संबंध एवं संधियों का दायित्व संभालता था।
प्रश्न 29 : शिवाजी महाराज के प्रशासन में सेना का प्रमुख अधिकारी कौन था?
A. पेशवा
B. सचिव
C. सेनापति
D. पाटिल
उत्तर: ✅ C
व्याख्या: सेनापति मराठा सेना का सर्वोच्च सैन्य अधिकारी था।
प्रश्न 30 : शिवाजी के प्रशासन में धर्म एवं दान विभाग का प्रमुख कौन था?
A. न्यायाधीश
B. मंत्री
C. पंडितराव
D. सुमंत
उत्तर: ✅ C
व्याख्या: पंडितराव धार्मिक मामलों, दान तथा धार्मिक संस्थाओं की देखरेख करता था।
प्रश्न 31 : ‘चौथ’ किस प्रकार का कर था?
A. कृषि कर
B. व्यापार कर
C. सुरक्षा कर
D. सिंचाई कर
उत्तर: ✅ C
व्याख्या: चौथ पड़ोसी राज्यों से सुरक्षा एवं आक्रमण न करने के बदले लिया जाने वाला कर था।
प्रश्न 32 : चौथ सामान्यतः कुल आय का कितना प्रतिशत होता था?
A. 10%
B. 20%
C. 25%
D. 50%
उत्तर: ✅ C
व्याख्या: चौथ की दर सामान्यतः 25% होती थी।
प्रश्न 33 : ‘सरदेशमुखी’ सामान्यतः कुल आय का कितना प्रतिशत होती थी?
A. 5%
B. 10%
C. 15%
D. 20%
उत्तर: ✅ B
व्याख्या: सरदेशमुखी एक अतिरिक्त कर था, जिसकी दर सामान्यतः 10% थी।
प्रश्न 34 : ‘गनिमी कावा’ किससे संबंधित है?
A. कर प्रणाली
B. न्याय व्यवस्था
C. गुरिल्ला युद्ध नीति
D. नौसेना
उत्तर: ✅ C
व्याख्या: गनिमी कावा शिवाजी द्वारा अपनाई गई प्रसिद्ध छापामार (Guerrilla Warfare) युद्ध प्रणाली थी।
प्रश्न 35 : शिवाजी महाराज की राजधानी कौन-सी थी?
A. पुणे
B. सतारा
C. रायगढ़
D. कोल्हापुर
उत्तर: ✅ C
व्याख्या: राज्याभिषेक के बाद रायगढ़ मराठा साम्राज्य की राजधानी बना।
प्रश्न 36 : शिवाजी की समुद्री सुरक्षा नीति का प्रमुख उद्देश्य क्या था?
A. केवल व्यापार करना
B. विदेशी शक्तियों से तटीय क्षेत्रों की रक्षा
C. धार्मिक प्रचार
D. केवल मत्स्य पालन
उत्तर: ✅ B
व्याख्या: शिवाजी ने समुद्री तटों की सुरक्षा, व्यापार की रक्षा तथा विदेशी शक्तियों पर नियंत्रण हेतु नौसेना विकसित की।
प्रश्न 37 : निम्नलिखित में से कौन-सा शिवाजी द्वारा विकसित प्रमुख समुद्री किला है?
A. गोलकुंडा
B. चित्तौड़
C. सिंधुदुर्ग
D. ग्वालियर
उत्तर: ✅ C
व्याख्या: सिंधुदुर्ग शिवाजी की समुद्री रक्षा नीति का प्रमुख किला था।
प्रश्न 38 : शिवाजी के प्रशासन में गाँव का मुख्य अधिकारी कौन था?
A. सूबेदार
B. फौजदार
C. पाटिल
D. कोतवाल
उत्तर: ✅ C
व्याख्या: पाटिल गाँव का प्रशासनिक प्रमुख होता था।
प्रश्न 39 : भूमि अभिलेख एवं राजस्व लेखा रखने वाला अधिकारी कौन था?
A. पाटिल
B. कुलकर्णी
C. सेनापति
D. सचिव
उत्तर: ✅ B
व्याख्या: कुलकर्णी भूमि रिकॉर्ड एवं राजस्व अभिलेख तैयार करता था।
प्रश्न 40 : शिवाजी महाराज ने प्रशासन में किस भाषा को विशेष महत्व दिया?
A. फारसी
B. अरबी
C. मराठी
D. उर्दू
उत्तर: ✅ C
व्याख्या: शिवाजी ने प्रशासन में मराठी को बढ़ावा दिया तथा संस्कृत को भी संरक्षण दिया।
प्रश्न 41 : शिवाजी महाराज के ज्येष्ठ पुत्र कौन थे?
A. शाहू
B. राजाराम
C. संभाजी
D. बालाजी
उत्तर: ✅ C
व्याख्या: शिवाजी के ज्येष्ठ पुत्र संभाजी महाराज थे, जिन्होंने उनके बाद शासन संभाला।
प्रश्न 42 : शिवाजी महाराज का निधन कब हुआ?
A. 1674
B. 1678
C. 1680
D. 1689
उत्तर: ✅ C
व्याख्या: शिवाजी महाराज का निधन 3 अप्रैल 1680 ई. को रायगढ़ में हुआ।
प्रश्न 43 : ‘शिवभारत’ ग्रंथ के लेखक कौन थे?
A. कृष्णाजी अनंत सभासद
B. कविन्द्र परमानंद
C. जदुनाथ सरकार
D. चिटणीस
उत्तर: ✅ B
व्याख्या: कविन्द्र परमानंद द्वारा रचित शिवभारत शिवाजी पर आधारित महत्वपूर्ण संस्कृत ग्रंथ है।
प्रश्न 44 : ‘सभासद बखर’ के लेखक कौन थे?
A. जी. एस. सरदेसाई
B. कृष्णाजी अनंत सभासद
C. सतीश चंद्र
D. अबुल फ़ज़ल
उत्तर: ✅ B
व्याख्या: कृष्णाजी अनंत सभासद ने ‘सभासद बखर’ की रचना की, जो शिवाजी के जीवन का महत्वपूर्ण स्रोत है।
प्रश्न 45 : निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
A. शिवाजी ने महिलाओं के सम्मान की रक्षा की।
B. शिवाजी ने धार्मिक स्थलों को नष्ट करने की नीति अपनाई।
C. शिवाजी ने नौसेना का विरोध किया।
D. शिवाजी ने किसानों पर अत्यधिक कर लगाए।
उत्तर: ✅ A
व्याख्या: शिवाजी महिलाओं के सम्मान, धार्मिक सहिष्णुता एवं जनकल्याणकारी शासन के लिए प्रसिद्ध थे।
प्रश्न 46 : शिवाजी महाराज की सफलता का प्रमुख कारण निम्नलिखित में से कौन-सा नहीं था?
A. गुप्तचर तंत्र
B. गुरिल्ला युद्ध
C. पर्वतीय भूगोल का उपयोग
D. विशाल हाथी सेना
उत्तर: ✅ D
व्याख्या: शिवाजी की सफलता का आधार तेज गति वाली सेना, गुप्तचर तंत्र एवं गुरिल्ला युद्ध था, न कि विशाल हाथी सेना।
प्रश्न 47 : निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित है?
A. पेशवा — विदेश विभाग
B. अमात्य — वित्त विभाग
C. सुमंत — न्याय विभाग
D. पंडितराव — सेना
उत्तर: ✅ B
व्याख्या:
- पेशवा → प्रधानमंत्री
- अमात्य → वित्त विभाग ✔️
- सुमंत → विदेश विभाग
- पंडितराव → धर्म विभाग
प्रश्न 48 : निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—
- शिवाजी ने संगठित नौसेना का विकास किया।
- उन्होंने धार्मिक सहिष्णुता की नीति अपनाई।
सही उत्तर चुनिए—
A. केवल 1
B. केवल 2
C. 1 और 2 दोनों
D. न तो 1, न ही 2
उत्तर: ✅ C
व्याख्या: दोनों कथन सही हैं। शिवाजी ने नौसेना को विकसित किया तथा सभी धर्मों के प्रति सम्मानजनक नीति अपनाई।
प्रश्न 49 : निम्नलिखित घटनाओं का सही कालक्रम चुनिए—
- अफजल खान प्रकरण
- पुरन्दर की संधि
- आगरा से पलायन
- राज्याभिषेक
A. 1 → 2 → 3 → 4
B. 2 → 1 → 3 → 4
C. 1 → 3 → 2 → 4
D. 3 → 2 → 1 → 4
उत्तर: ✅ A
व्याख्या:
- 1659 – अफजल खान प्रकरण
- 1665 – पुरन्दर की संधि
- 1666 – आगरा से पलायन
- 1674 – राज्याभिषेक
प्रश्न 50 : निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—
- शिवाजी के समय पेशवा शासन का सर्वोच्च अधिकारी था।
- अष्टप्रधान परिषद के सदस्य छत्रपति के प्रति उत्तरदायी थे।
- चौथ सामान्यतः 25% कर था।
सही उत्तर चुनिए—
A. केवल 1 और 2
B. केवल 2 और 3
C. केवल 1 और 3
D. 1, 2 और 3
उत्तर: ✅ B
व्याख्या:
- कथन 1: ❌ गलत — शिवाजी के शासन में सर्वोच्च अधिकारी छत्रपति थे, पेशवा नहीं।
- कथन 2: ✅ सही — अष्टप्रधान परिषद के सभी सदस्य छत्रपति के प्रति उत्तरदायी थे।
- कथन 3: ✅ सही — चौथ सामान्यतः 25% कर था।


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