छत्तीसगढ़ की महिलाओं के पारम्परिक आभूषण

chhattisgarh ke paramparik aabhushan

(Traditional Jewellery of Chhattisgarh Women – CGPSC Notes)

छत्तीसगढ़ की संस्कृति में पारम्परिक आभूषणों का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। यहाँ की महिलाओं में सौंदर्य-बोध उच्च स्तर का होता है, और वे विभिन्न प्रकार के आभूषणों का उपयोग अपनी सुंदरता, सामाजिक पहचान तथा परंपरा को दर्शाने के लिए करती हैं।

नीचे आभूषणों को शरीर के अंगों के अनुसार व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत किया गया है 👇


(1) सिर (Head) के आभूषण

इन आभूषणों को बालों, जूड़े और मांग (माथे की रेखा) में पहना जाता है।

प्रमुख आभूषण:

  • जंगली फूल → बालों या जूड़े में सजावट के लिए लगाए जाते हैं (विशेषकर त्योहारों में)
  • पंख → बालों में सजाकर पारंपरिक एवं जनजातीय पहचान दर्शाते हैं
  • कौड़ियां → बालों या सिर के आभूषण में सजावट हेतु
  • ककई → बालों में पहनने वाला पारंपरिक सजावटी आभूषण
  • मांग मोती → मांग (बालों की बीच की रेखा) में पहना जाता है
  • पटिया → सिर के आगे के भाग में सजाया जाता है
  • बेनी → बालों की चोटी (braid) में लगाया जाता है
  • कंघी (सजावटी) → बालों में सजावट के रूप में उपयोग

(2) गले (Neck) के आभूषण

ये आभूषण गले और गर्दन के चारों ओर पहने जाते हैं।

प्रमुख आभूषण:

  • सुता / सुतिया (रुपिया) → गले में पहनी जाने वाली धातु की माला
  • दूलरी → गले में पहनने वाली पारंपरिक माला
  • तितली → तितली आकार की सजावटी माला
  • मोती हंसली → गर्दन के पास फिट होकर पहनी जाने वाली मोती की माला
  • मूंगा माला → मूंगे (coral) से बनी माला

अन्य आभूषण:

  • पुतरी → गले में पहनने वाली छोटी माला
  • ढोलकी → ढोल आकार के लॉकेट वाली माला
  • ताबीज → गले में सुरक्षा/आस्था हेतु पहना जाता है
  • मोहर / कलदार → सिक्कों से बनी माला
  • कंठा → मोटी और भारी पारंपरिक माला

(3) हाथ (Hands & Arms) के आभूषण

ये आभूषण कलाई, बांह और उंगलियों में पहने जाते हैं।

प्रमुख आभूषण:

  • चूड़ियाँ (कांच, लाख, चांदी) → कलाई में पहनी जाती हैं, सुहाग का प्रतीक
  • बहुँटा → कलाई या हाथ में पहना जाने वाला मोटा आभूषण
  • बाजूबंद → ऊपरी बांह (biceps) में पहना जाता है
  • नांगमोरी → हाथ का पारंपरिक आभूषण
  • हरईया → हाथों में पहनने वाला आभूषण

कलाई के विशेष आभूषण:

  • ऐंठी → कलाई में पहनी जाती है
  • कंकनी → पतली चूड़ी जैसी कलाई में
  • पटा → चौड़ी कलाई ब्रेसलेट
  • बनुरिया → सजावटी कंगन
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(4) नाक एवं कान (Nose & Ear) के आभूषण

(A) नाक के आभूषण:

  • नथ / नथनी → नाक के नीचे के भाग में (विशेष अवसर/विवाह)
  • बेसर → नाक के एक ओर पहना जाता है
  • लौंग → नाक के छोटे छेद में
  • फूली → लौंग के समान, नाक के एक या दोनों ओर
  • खेनवा → नाक का पारंपरिक आभूषण
  • बुलाक → नाक के बीच वाले भाग में (septum)

(B) कान के आभूषण:

  • झुमका → कान के निचले भाग (earlobe) में
  • बाली → गोल आकार की बालियां
  • लरकी → लंबी लटकन वाली बालियां
  • खूंटी → कान के ऊपरी भाग में
  • लवंगफूल → फूल आकार की बाली
  • खोटिला → पारंपरिक भारी कान आभूषण
  • तित्तरी → विशेष डिजाइन की बाली

(5) पैर (Feet) के आभूषण

ये आभूषण टखनों और पैरों की उंगलियों में पहने जाते हैं।

टखनों के आभूषण:

  • पैरी → टखनों में पहनी जाती है, इसमें धातु के कण होते हैं जो चलने पर मधुर ध्वनि करते हैं
  • गठिया → मोटा पायल जैसा आभूषण
  • तोड़ा → भारी टखने का आभूषण
  • घुंघरू → आवाज करने वाला पायल

अन्य:

  • काचूरा (कांसे का) → टखनों में
  • झांझर → भारी पायल
  • लच्छा → सजावटी पायल

उंगलियों के आभूषण:

  • चुटकी → पैर की उंगलियों में
  • बिछिया → विवाहित महिलाओं द्वारा पहनी जाती है (toe ring)

(6) अन्य आभूषण (Miscellaneous)

  • कमरबंध (कौड़ियों का) → कमर में पहना जाता है
  • करधनी (चांदी) → कमर के चारों ओर
  • लाख का गजरा → जूड़े (hair bun) में
  • गोदना (Tattoo) → शरीर पर स्थायी आभूषण के रूप में
  • टिकली → माथे के बीच में
  • बिंदिया → माथे पर, सौंदर्य और वैवाहिक प्रतीक

✨ विशेष तथ्य (Extra Points for Exams)

  • छत्तीसगढ़ के आभूषणों में प्राकृतिक वस्तुओं (फूल, पंख, कौड़ी) का विशेष उपयोग होता है।
  • अधिकांश आभूषण चांदी (Silver) के बने होते हैं।
  • आभूषण केवल सौंदर्य ही नहीं, बल्कि सामाजिक स्थिति, वैवाहिक स्थिति और परंपरा का भी प्रतीक हैं।
  • गोदना (Tattoo) को भी स्थायी आभूषण माना जाता है।

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Responses

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