भारत का भूगोल : सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए

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भारत का भूगोल : UPSC, State PSC, VYAPAM and all other Exams


यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा का भूगोल पाठ्यक्रम (UPSC Prelims Geography Syllabus in Hindi) यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के सभी तीन चरणों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार/व्यक्तित्व परीक्षण—में एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। आईएएस प्रारंभिक परीक्षा के अंतर्गत सामान्य अध्ययन पेपर-1 में मानव, भारतीय एवं विश्व भूगोल से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं, जिनमें भारत तथा विश्व का भौतिक, सामाजिक और आर्थिक भूगोल सम्मिलित होता है। वहीं, यूपीएससी मुख्य परीक्षा में भूगोल, सामान्य अध्ययन पेपर-1 (भारतीय विरासत एवं संस्कृति, विश्व एवं समाज का इतिहास तथा भूगोल) का एक प्रमुख हिस्सा होता है।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए यूपीएससी भूगोल पाठ्यक्रम मुख्य रूप से 3 भागों में विभाजित है, जो हैं –

  1. भारतीय भूगोल
  2. मानव भूगोल
  3. विश्व भूगोल

जो अभ्यर्थी भूगोल को वैकल्पिक विषय के रूप में चुनते हैं, उनके लिए कुल 250-250 अंकों के दो पेपर—पेपर-VI और पेपर-VII—आयोजित किए जाते हैं, जिनकी अवधि प्रत्येक के लिए 3 घंटे होती है। यूपीएससी भूगोल वैकल्पिक पाठ्यक्रम में भौतिक और मानव भूगोल दोनों को शामिल किया गया है, जिसे दो भागों में विभाजित किया गया है—

  • पेपर-I भौतिक भूगोल पर केंद्रित होता है, जिसमें भू-आकृति विज्ञान, जलवायु विज्ञान, समुद्र विज्ञान तथा जैव भूगोल जैसे विषय शामिल हैं।
  • पेपर-II में मानव भूगोल, आर्थिक भूगोल एवं क्षेत्रीय नियोजन पर विशेष जोर दिया जाता है।

यह पाठ्यक्रम अभ्यर्थियों की भौगोलिक अवधारणाओं की समझ तथा उन्हें वास्तविक जीवन की परिस्थितियों में लागू करने की क्षमता का मूल्यांकन करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। अपनी तार्किक संरचना, सामान्य अध्ययन विषयों के साथ व्यापक ओवरलैप और अध्ययन सामग्री की भरपूर उपलब्धता के कारण, भूगोल यूपीएससी परीक्षा के लिए एक लोकप्रिय एवं स्कोरिंग वैकल्पिक विषय के रूप में उभरा है।

अब यह बात समझना आवश्यक है कि, यूपीएससी मेन्स में भूगोल को वैकल्पिक विषय क्यों चुनना चाहिए ?


यूपीएससी मेन्स (UPSC Mains) में भूगोल को वैकल्पिक विषय क्यों चुनें?

  1. सिलेबस का सामान्य अध्ययन से बड़ा ओवरलैप
    भूगोल का सिलेबस GS पेपर-1, GS पेपर-3 (पर्यावरण, आपदा प्रबंधन) और निबंध से काफी हद तक जुड़ा हुआ है, जिससे एक ही तैयारी कई पेपरों में काम आती है।
  2. तार्किक और वैज्ञानिक विषय
    भूगोल तथ्य आधारित होने के साथ-साथ कारण-परिणाम (Cause–Effect) पर आधारित है, जिससे उत्तरों में विश्लेषण और स्पष्टता लाना आसान होता है।
  3. मानचित्र, आरेख और फ्लो-चार्ट से उत्तर बेहतर बनते हैं
    भूगोल में नक्शों और डायग्राम का प्रयोग कर कम शब्दों में प्रभावी उत्तर लिखा जा सकता है, जिससे अंक बढ़ने की संभावना रहती है।
  4. सीमित और स्पष्ट सिलेबस
    कई अन्य वैकल्पिक विषयों की तुलना में भूगोल का पाठ्यक्रम स्पष्ट रूप से परिभाषित है और अनावश्यक विस्तार कम है।
  5. अध्ययन सामग्री आसानी से उपलब्ध
    NCERT से लेकर स्टैंडर्ड रेफरेंस बुक्स, नोट्स, मैप्स और ऑनलाइन संसाधन आसानी से मिल जाते हैं।
  6. तकनीकी पृष्ठभूमि आवश्यक नहीं
    विज्ञान या आर्ट्स किसी भी पृष्ठभूमि के अभ्यर्थी भूगोल को आसानी से समझ और तैयार कर सकते हैं।
  7. उत्तर लेखन में स्कोरिंग विषय
    अच्छे डायग्राम, समसामयिक उदाहरण और केस स्टडी जोड़कर उच्च अंक प्राप्त किए जा सकते हैं।
  8. करंट अफेयर्स से सीधा जुड़ाव
    जलवायु परिवर्तन, आपदाएँ, संसाधन, शहरीकरण, कृषि और पर्यावरण जैसे मुद्दे रोज़मर्रा की खबरों से जुड़े होते हैं।
  9. स्थिर (Static) और गतिशील (Dynamic) दोनों विषयों का संतुलन
    भूगोल में स्टैटिक कंटेंट भी है और समसामयिक घटनाओं से जोड़ने की गुंजाइश भी, जिससे उत्तर और समृद्ध बनते हैं।
  10. टॉपर्स द्वारा प्रमाणित विषय
    इरा सिंघल, ऐश्वर्या वर्मा और जुनैद अहमद जैसे कई टॉपर्स ने भूगोल को वैकल्पिक विषय चुनकर शानदार रैंक हासिल की है।
  11. कम समय में रिवीजन संभव
    सिलेबस को माइंड-मैप और शॉर्ट नोट्स में बदला जा सकता है, जिससे अंतिम समय में दोहराव आसान होता है।
  12. प्रशासनिक दृष्टिकोण से उपयोगी
    नीति निर्माण, क्षेत्रीय योजना, संसाधन प्रबंधन और आपदा प्रबंधन जैसे विषय भविष्य के प्रशासक के लिए बेहद उपयोगी हैं।

UPSC भूगोल विस्तृत पाठ्यक्रम

प्रश्न पत्र-1

भूगोल के सिद्धांत (Principles of Geography)

प्राकृतिक भूगोल (Physical Geography)

  1. भूआकृतिक विज्ञानः भूआकृतिक विकास के नियंत्रक कारक; अंतर्जात एवं बहिर्जात बल; भूपर्पटी का उद्गम एवं विकास; भू-चुंबकत्व के मूल सिद्धांत; पृथ्वी के अंतरंग की प्राकृतिक दशाएँ; भू-अभिनति; महाद्वीपीय विस्थापन; समस्थिति; प्लेट विवर्तनिकी; पर्वतोत्पत्ति के संबंध में अभिनव विचार; ज्वालामुखीयता; भूकंप एवं सुनामी, भूआकृति चक्र एवं दृश्यभूमि विकास की संकल्पनाएँ; अनाच्छादन कालानुक्रम; जलमार्ग आकृतिविज्ञान; अपरदन पृष्ठ; प्रवणता विकास; अनुप्रयुक्त भूआकृति विज्ञान; भूजलविज्ञान, आर्थिक भूविज्ञान एवं पर्यावरण।
  2. जलवायु विज्ञानः विश्व के ताप एवं दाब कटिबंध; पृथ्वी का तापीय बजट; वायुमंडल परिसंचरण; वायुमंडल स्थिरता एवं अस्थिरता; भूमंडलीय एवं स्थानीय पवन; मानसून एवं जेट प्रवाह; वायु राशि एवं वाताग्रजनन; कोपेन, थॉर्नवेट एवं त्रेवार्था एवं त्रेवार्था का विश्व जलवायु वर्गीकरण; जलीय चक्र; विश्व जलवायु परिवर्तन एवं जलवायु परिवर्तन में मानव की भूमिका एवं अनुक्रिया; अनुप्रयुक्त जलवायु विज्ञान एवं नगरी जलवायु।
  3. समुद्र विज्ञानः अटलांटिक, हिंद एवं प्रशांत महासागरों की तलीय स्थलाकृति; महासागरों का ताप एवं लवणता; ऊष्मा एवं लवण बजट, महासागरीय निक्षेप; तरंग धाराएँ एवं ज्वार-भाटा; समुद्री संसाधन; जीवीय, खनिज एवं ऊर्जा संसाधन; प्रवाल भित्तियाँ, प्रवाल विरंजन; समुद्र तल परिवर्तन; समुद्री नियम एवं समुद्री प्रदूषण।
  4. जीव भूगोलः मृदाओं की उत्पत्ति; मृदाओं का वर्गीकरण एवं वितरण; मृदा परिच्छेदिका; मृदा अपरदन; न्यूनीकरण एवं संरक्षण; पादप एवं जंतुओं के वैश्विक वितरण को प्रभावित करने वाले कारक; वन अपरोपण की समस्याएँ एवं संरक्षण के उपाय; सामाजिक वानिकी; कृषि वानिकी; वन्य जीवन; प्रमुख जीन पूल केन्द्र।
  5. पर्यावरणीय भूगोलः पारिस्थितिकी के सिद्धांत; मानव पारिस्थितिक अनुकूलन; पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण पर मानव का प्रभाव; वैश्विक एवं क्षेत्रीय पारिस्थितिकी परिवर्तन एवं असंतुलन; पारितंत्र, उनका प्रबंधन एवं संरक्षण; पर्यावरणीय निम्नीकरण, प्रबंध एवं संरक्षण; जैव-विविधता एवं संपोषणीय विकास; पर्यावरणीय शिक्षा एवं विधान।

मानव भूगोल (Human Geography) 

  1. मानव भूगोल में संदर्शः क्षेत्रीय विभेदन; प्रादेशिक संश्लेषण; द्विभाजन एवं द्वैतवाद; पर्यावरणवाद; मात्रात्मक क्रांति एवं अवस्थिति विश्लेषण; उग्रसुधार, व्यावहारिक, मानवीय एवं कल्याण उपागम; भाषाएँ, धर्म एवं धर्मनिरपेक्षता; विश्व के सांस्कृतिक प्रदेश; मानव विकास सूचकांक|
  2. आर्थिक भूगोलः विश्व आर्थिक विकासः माप एवं समस्याएँ; विश्व संसाधन एवं उनका वितरण; ऊर्जा संकट; संवृद्धि की सीमाएँ; विश्व कृषिः कृषि प्रदेशों की प्रारूपता; कृषि निवेश एवं उत्पादकता; खाद्य एवं पोषण समस्याएँ; खाद्य सुरक्षा; दुर्भिक्षः कारण, प्रभाव एवं उपचार; विश्व उद्योग, अवस्थानिक प्रतिरूप एवं समस्याएँ; विश्व व्यापार के प्रतिमान।
  3. जनसंख्या एवं बस्ती भूगोलः विश्व जनसंख्या की वृद्धि और वितरण; जनसांख्यिकी गुण; प्रवासन के कारण एवं परिणाम; अतिरेक-अल्प एवं अनुकूलतम जनसंख्या की संकल्पनाएँ; जनसंख्या के सिद्धांत; विश्व की जनसंख्या समस्याएँ और नीतियाँ; सामाजिक कल्याण एवं जीवन गुणवत्ता; सामाजिक पूंजी के रूप में जनसंख्या; ग्रामीण बस्तियों के प्रकार एवं प्रतिरूप; ग्रामीण बस्तियों में पर्यावरणीय मुद्दे; नगरीय बस्तियों का पदानुक्रम; नगरीय आकारिकी; प्रमुख शहर एवं श्रेणी आकार प्रणाली की संकल्पना; नगरों का प्रकार्यात्मक वर्गीकरण; नगरीय प्रभाव क्षेत्र; ग्राम नगर उपांत; अनुषंगी नगर; नगरीकरण की समस्याएँ एवं समाधान; नगरों का संपोषणीय विकास।
  4. प्रादेशिक आयोजनः प्रदेश की संकल्पना; प्रदेशों के प्रकार एवं प्रदेशीकरण की विधियाँ; वृद्धि केन्द्र तथा वृद्धि ध्रुव; प्रादेशिक असंतुलन; प्रादेशिक विकास कार्यनीतियाँ; प्रादेशिक आयोजन में पर्यावरणीय मुद्दे; संपोषणीय विकास के लिये आयोजन।
  5. मानव भूगोल में मॉडल, सिद्धान्त एवं नियमः मानव भूगोल में तंत्र विश्लेषण; माल्थस का, मार्क्स का और जनसांख्यिकीय संक्रमण मॉडल; क्रिस्टा़वर एवं लॉश का केन्द्रीय स्थान सिद्धान्त; पेरू एवं बूदविए; वॉन थूनेन का कृषि अवस्थिति मॉडल, वेबर का औद्योगिक अवस्थिति मॉडल; ओस्तोव का वृद्धि अवस्था मॉडल; अंतःभूमि एवं बहिःभूमि सिद्धान्त; अंतर्राष्ट्रीय सीमाएँ एवं सीमांत क्षेत्र के नियम।

प्रश्न पत्र -2

भारत का भूगोल (Geography of India)

महत्वपूर्ण नोट :  इस प्रश्नपत्र में दिये गए विषयों से संगत एक मानचित्र-आधारित प्रश्न का उत्तर देना अनिवार्य होगा।


महत्वपूर्ण नोट्स :

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