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UPSC Full Form (UPSC फुल फॉर्म)
UPSC का पूर्ण रूप ‘संघ लोक सेवा आयोग’ (Union Public Service Commission) है। यह भारत की केन्द्रीय एजेंसी है, जो सिविल सेवा परीक्षा (CSE) सहित विभिन्न प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाएँ आयोजित करती है। इन परीक्षाओं के माध्यम से भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS), भारतीय विदेश सेवा (IFS) जैसी सर्वोच्च सरकारी सेवाओं हेतु अधिकारियों की भर्ती की जाती है।
UPSC के मुख्य कार्य:
- संघ की सेवाओं में नियुक्तियों के लिए परीक्षाओं का आयोजन
- विभिन्न भर्ती योजनाओं एवं प्रक्रियाओं का संचालन
- नियुक्ति, पदोन्नति, स्थानांतरण तथा अनुशासनात्मक मामलों पर परामर्श प्रदान करना
UPSC द्वारा आयोजित प्रमुख परीक्षाएँ:
- राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) तथा संयुक्त रक्षा सेवा (CDS) परीक्षाएँ
- सिविल सेवा परीक्षा (CSE) : IAS, IPS, IFS आदि के लिए
UPSC क्या है ? What is UPSC?
UPSC (यूपीएससी) का मतलब संघ लोक सेवा आयोग (Union Public Service Commission) है, जो भारत का एक संवैधानिक निकाय है और यह विभिन्न केंद्रीय और अखिल भारतीय सेवाओं (जैसे IAS, IPS, IFS) के अधिकारियों की भर्ती के लिए देश की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा (CSE) आयोजित करता है, जो भारत सरकार की सर्वोच्च नौकरशाही की रीढ़ है.
मुख्य बातें:
- पूर्ण रूप: संघ लोक सेवा आयोग (Union Public Service Commission).
- कार्य: अखिल भारतीय सेवाओं (IAS, IPS, IFS) और केंद्रीय सेवाओं (Group A & B) के लिए अधिकारियों की भर्ती करना.
- परीक्षा: यह सिविल सेवा परीक्षा (CSE) आयोजित करता है, जो भारत की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक है.
- संवैधानिक दर्जा: यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 315-323 के तहत स्थापित है.
- भूमिका: यह भारत की नौकरशाही को योग्य और सक्षम अधिकारी प्रदान करने के लिए जिम्मेदार है, जिससे देश का सुचारु प्रशासन चलता है.
👉 अधिक जानकारी के लिए : UPSC ऑफिसियल वैबसाइट (यहाँ क्लिक करें)
UPSC द्वारा कौन सी परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं?
नीचे संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा आयोजित परीक्षाओं की सूची दी गई है:
| क्रम सं. | परीक्षा का नाम (UPSC) | उद्देश्य / श्रेणी |
|---|---|---|
| 1 | सिविल सेवा परीक्षा (Civil Services Examination – CSE) | भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS), भारतीय विदेश सेवा (IFS) तथा अन्य केन्द्रीय सेवाओं के लिए भर्ती |
| 2 | भारतीय अभियांत्रिकी सेवा परीक्षा (Engineering Services Examination – ESE/IES) | विभिन्न केन्द्रीय विभागों/संस्थानों में अभियांत्रिकी सेवाओं हेतु भर्ती |
| 3 | संयुक्त चिकित्सा सेवा परीक्षा (Combined Medical Services Examination – CMS) | केन्द्रीय सरकारी विभागों/संस्थाओं में चिकित्सा अधिकारियों के चयन हेतु |
| 4 | संयुक्त रक्षा सेवा परीक्षा (Combined Defence Services Examination – CDS) | थल सेना, नौसेना एवं वायु सेना में अधिकारी प्रशिक्षण के लिए चयन |
| 5 | राष्ट्रीय रक्षा अकादमी परीक्षा (National Defence Academy – NDA) | एन.डी.ए. में (कक्षा 12 के बाद) सेना, नौसेना और वायु सेना में प्रशिक्षण हेतु प्रवेश |
| 6 | नौसेना अकादमी परीक्षा (Naval Academy Examination – NA) | भारतीय नौसेना अकादमी में (कक्षा 12 के बाद) प्रवेश हेतु |
| 7 | विशेष श्रेणी रेलवे अपरेंटिस परीक्षा (Special Class Railway Apprentice – SCRA) | रेलवे यांत्रिक विभाग में प्रशिक्षु चयन (वर्तमान में यह परीक्षा बंद है) |
| 8 | भारतीय वन सेवा परीक्षा (Indian Forest Service Examination – IFoS) | भारतीय वन सेवा के अधिकारियों की भर्ती हेतु |
| 9 | भारतीय आर्थिक सेवा / भारतीय सांख्यिकी सेवा परीक्षा (IES/ISS Examination) | आर्थिक एवं सांख्यिकी सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन |
| 10 | संयुक्त भू-विज्ञानी परीक्षा (Combined Geo-Scientist Examination) | भू-विज्ञानी, भू-भौतिकीविद्, जल-विज्ञानी आदि पदों पर भर्ती |
| 11 | केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (असिस्टेंट कमांडेंट) परीक्षा – CAPF (AC) | BSF, CRPF, CISF, ITBP, SSB में असिस्टेंट कमांडेंट पद हेतु भर्ती |
👉 अधिक जानकारी के लिए : UPSC सक्रिय परीक्षाओं की जानकारी – ऑफिसियल वैबसाइट (यहाँ क्लिक करें)
UPSC का इतिहास (History Of UPSC)
UPSC का ऐतिहासिक परिदृश्य
ईस्ट इंडिया कंपनी में उच्च प्रशासनिक पदों के लिए चयन और नियुक्ति की प्रक्रिया प्रारम्भ में ब्रिटिश सरकार के निर्देशों के अनुसार संचालित होती थी। भारत में सक्षम और योग्य अधिकारियों की भर्ती की आवश्यकता को देखते हुए, 1854 में ब्रिटिश सरकार ने भारत के लिए एक संगठित “सिविल सेवा” (Civil Service) बनाने हेतु लॉर्ड मैकॉले की अध्यक्षता में एक समिति गठित की। इस समिति ने भारत के लिए एक व्यवस्थित “मुक्त प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षा प्रणाली” (Open Competitive Examination System) प्रारम्भ करने की सिफारिश की।
इसी सिफारिश के आधार पर 1854 में लंदन में सिविल सेवा परीक्षा की स्थापना की गई और 1855 में परीक्षाएँ आरम्भ हुईं। प्रारम्भिक वर्षों में भारतीय सिविल सेवा परीक्षा के लिए अधिकतम आयु 23 वर्ष और न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित थी। परीक्षा पूरी तरह लंदन में आयोजित होती थी, जिसके कारण अधिकांश भारतीयों के लिए इसमें भाग लेना कठिन था।
फिर भी, कुछ भारतीय युवाओं ने इस चुनौती को स्वीकार किया। श्री सत्येन्द्रनाथ टैगोर, जो कि रवीन्द्रनाथ टैगोर के बड़े भाई थे, 1864 में भारतीय सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले पहले भारतीय बने। तत्पश्चात अन्य भारतीयों ने भी इस परीक्षा में सफलता प्राप्त की।
20वीं शताब्दी के प्रारम्भ तक भारतीय परीक्षार्थियों को भी धीरे-धीरे अवसर मिलने लगे। ब्रिटिश सरकार द्वारा किए गए सुधारों के माध्यम से भारतीयों को सीमित संख्या में प्रशासनिक अवसर दिए जाने लगे। 1893 में पहली बार 10% पद भारतीयों के लिए आरक्षित किए गए। आगे चलकर 1939 तक आरक्षण की सीमा बढ़ी और भारतीयों की भर्ती में सुधार होने लगे।
भारतीय सिविल सेवा (ICS) प्रशिक्षण का इतिहास
शुरुआत में भारतीय उम्मीदवारों का प्रशिक्षण लंदन में दिया जाता था। 1867 से 1885 के बीच उम्मीदवारों को जर्मनी के हाइलडेलबर्ग विश्वविद्यालय में प्रशिक्षित किया गया। 1905 से प्रशिक्षण का एक भाग ऑक्सफ़ोर्ड और कैम्ब्रिज में भी संचालित हुआ।
1920 में निर्णय लिया गया कि भारतीय उम्मीदवारों के लिए कुछ पद भारत में प्रशिक्षण हेतु भी उपलब्ध कराए जाएंगे, जबकि कुछ प्रशिक्षण इंग्लैंड में ही जारी रहेगा। स्वतंत्रता के पश्चात, भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) का अंतिम रूप वर्ष 1951 में तथा पूर्ण संरचना 1966 में स्थापित हुई।
सिविल सेवा में भर्ती, सुधार एवं आयोगों की स्थापना
ब्रिटिश भारत में प्रशासनिक सुधारों को लागू करने हेतु कई आयोग गठित किए गए—
- एटचिसन आयोग (1886)
- फ्रेजर आयोग (1902)
- ली आयोग (1924)
एटचिसन आयोग ने सिविल सेवाओं को तीन श्रेणियों में विभाजित किया:
- इम्पीरियल सर्विस
- प्रोविंशियल सर्विस
- सबॉर्डिनेट सर्विस
ली आयोग की सिफारिश पर 1926 में पहला लोक सेवा आयोग भारत में स्थापित किया गया। इसमें एक अध्यक्ष और चार सदस्य थे। हालांकि, इसके अधिकार सीमित थे और वास्तविक नियंत्रण अभी भी भारत सचिव (Secretary of State) के पास था।
भारतीय लोक सेवा आयोग से संघ लोक सेवा आयोग तक
भारत सरकार अधिनियम 1935 के अनुसार लोक सेवा आयोग को अधिक संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया। अन्ततः, 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के साथ ही यह संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के रूप में स्थापित हुआ।
👉 अधिक जानकारी के लिए : UPSC ऐतिहासिक परिदृश्य pdf (ऑफिसियल वैबसाइट)
UPSC संवैधानिक उपबंध (UPSC Constitutional Provisions)
- अनुच्छेद- 315. संघ और राज्यों के लिए लोक सेवा आयोग
- अनुच्छेद- 316. सदस्यों की नियुक्ति और पदावधि
- अनुच्छेद- 317. लोक सेवा आयोग के किसी सदस्य का हटाया जाना और निलंबित किया जाना
- अनुच्छेद- 318. आयोग के सदस्यों और कर्मचारिवृंद की सेवा की शर्तों के बारे में विनियम बनाने की शक्ति
- अनुच्छेद- 319. आयोग के सदस्यों द्वारा ऐसे सदस्य न रहने पर पद धारण करने के संबंध में प्रतिषेध
- अनुच्छेद- 320 लोक सेवा आयोगों के कृत्य
- अनुच्छेद- 321. लोक सेवा आयोगों के कृत्यों का विस्तार करने की शक्ति
- अनुच्छेद- 322. लोक सेवा आयोगों के व्यय
- अनुच्छेद-323. लोक सेवा आयोगों के प्रतिवेदन
UPSC के कार्य (Functions of UPSC)
UPSC official website के अनुसार : संविधान के अनुच्छेद 320 के अंतर्गत, अन्य बातों के साथ-साथ सिविल सेवाओं तथा पदों के लिए भर्ती संबंधी सभी मामलों में आयोग का परामर्श लिया जाना अनिवार्य होता है। संविधान के अनुच्छेद 320 के अंतर्गत आयोग के प्रकार्य इस प्रकार हैं:
- संघ के लिए सेवाओं में नियुक्ति हेतु परीक्षा आयोजित करना
- साक्षात्कार द्वारा चयन से सीधी भर्ती
- प्रोन्नति/ प्रतिनियुक्ति/ आमेलन द्वारा अधिकारियों की नियुक्ति
- सरकार के अधीन विभिन्न सेवाओं तथा पदों के लिए भर्ती नियम तैयार करना तथा उनमें संशोधन
- विभिन्न सिविल सेवाओं से संबंधित अनुशासनिक मामले
- भारत के राष्ट्रपति द्वारा आयोग को प्रेषित किसी भी मामले में सरकार को परामर्श देना
UPSC के विभाग (Divisions of UPSC) Official Links
- प्रशासन
- अखिल भारतीय सेवाएं
- पदोन्नति एवं प्रतिनियुक्ति शाखा
- परीक्षा
- सामान्य
- भर्ती
- भर्ती नियम
- अनुशासनिक एवं अपील मामले शाखा
- नीति एवं समन्वय शाखा
- पुस्तकालय
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नागरिक घोषणापत्र
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