छत्तीसगढ़ के लोक नृत्य (CGPSC नोट्स)
छत्तीसगढ़ के लोक नृत्य राज्य की जनजातीय संस्कृति, परंपराओं, धार्मिक आस्थाओं एवं ऋतु-चक्र से गहराई से जुड़े हुए हैं। इन नृत्यों में पारंपरिक वेशभूषा, आभूषण, ताल-वाद्य और सामूहिकता का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। CGPSC परीक्षा के दृष्टिकोण से इनके प्रकार, विशेषताएँ, क्षेत्रीय विविधता और सामाजिक महत्व जानना महत्वपूर्ण है।
1. सैला नृत्य (Saila Dance)
मुख्य बिंदु:
- केवल पुरुषों (लड़कों) द्वारा किया जाता है।
- समय: अगहन (नवंबर-दिसंबर), फसल कटाई के बाद
- डांडिया जैसा नृत्य (लाठियों का उपयोग)
विशेषताएँ:
- नर्तक घर-घर जाकर नृत्य करते हैं।
- ग्रामीण लोग उन्हें धान (अन्न) भेंट करते हैं।
- मांदर (ढोल) की ताल पर नृत्य
प्रकार:
- बैठकी सैला
- ठाड़ी सैला
- शिकारी सैला
- चक्रमार सैला
महत्वपूर्ण तथ्य (CGPSC):
- सरगुजा क्षेत्र में अधिक प्रचलित
- कुछ क्षेत्रों में इसे दशहरा नृत्य भी माना जाता है

2. करमा नृत्य (Karma Dance)
मुख्य बिंदु:
- जनजातियाँ: गोंड, बैगा, उरांव
- पर्व: भाद्रपद शुक्ल एकादशी (करमा पर्व)
विशेषताएँ:
- करम वृक्ष की पूजा की जाती है।
- नृत्य गोलाकार रूप में किया जाता है।
- उर्वरता (Fertility) से संबंधित नृत्य
वाद्य यंत्र:
- टिमकी, मादर, झुमकी, पायरी
प्रकार:
- झूमर, लहकी, दोहारी, तेंगवानी आदि
महत्वपूर्ण तथ्य:
- मध्य भारत के कई राज्यों में प्रचलित
- वर्षा ऋतु के अंत का प्रतीक

3. सुआ नृत्य / सुवा नृत्य (Sua Dance)
मुख्य बिंदु:
- केवल महिलाओं द्वारा किया जाता है
- समय: दीपावली से पहले
विशेषताएँ:
- “सुआ” = तोता
- महिलाएँ तोते की चाल की नकल करती हैं
- मिट्टी के घड़े पर लकड़ी का तोता रखा जाता है
वाद्य:
- कोई विशेष वाद्य नहीं, केवल ताली और ठिसकी

4. पंडवानी (Pandavani)
मुख्य बिंदु:
- महाभारत की कथाओं पर आधारित लोकगाथा
शैली:
- वेदमती (बैठकर)
- कपालिक (नाटकीय शैली)
महत्वपूर्ण व्यक्तित्व:
- Teejan Bai — पद्मश्री एवं पद्मभूषण से सम्मानित

5. पंथी नृत्य (Panthi Dance)
मुख्य बिंदु:
- समुदाय: सतनामी समाज
- अवसर: गुरु घासीदास जयंती (माघ पूर्णिमा)
विशेषताएँ:
- आध्यात्मिक एवं दार्शनिक नृत्य
- पिरामिड जैसी संरचना बनाना
मुद्राएँ:
- जैतखंभ
- धरती प्रणाम
- फूल अर्पण
महत्वपूर्ण व्यक्तित्व:
- Devdas Banjara

6. राउत नाचा (Raut Nacha)
मुख्य बिंदु:
- समुदाय: यादव (ग्वाला वर्ग)
- समय: दीपावली के बाद (देव उठनी एकादशी)
विशेषताएँ:
- श्रीकृष्ण से संबंधित
- कंस वध की कथा का प्रदर्शन
वाद्य:
- ढोल, मृदंग, मंजीरा

7. झिरलिटी नृत्य (Jhirliti Dance)
मुख्य बिंदु:
- मुख्यतः बच्चों द्वारा किया जाता है
- क्षेत्र: बस्तर
विशेषताएँ:
- बच्चे अजीब वेशभूषा पहनकर घर-घर जाते हैं
- बदले में अनाज प्राप्त करते हैं

8. गेंड़ी नृत्य (Gendi Dance)
मुख्य बिंदु:
- बाँस की ऊँची लाठियों (गेंड़ी) पर किया जाता है
विशेषताएँ:
- संतुलन और कौशल का प्रदर्शन
- आकर्षक और रोमांचक नृत्य

9. रहस नृत्य (Rahas Dance)
मुख्य बिंदु:
- क्षेत्र: धमतरी
विशेषताएँ:
- राधा-कृष्ण की रासलीला पर आधारित
- धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व
10. काकसार नृत्य (Kaksar Dance)
मुख्य बिंदु:
- जनजाति: अबुझमाड़िया (बस्तर)
विशेषताएँ:
- वर्षा से पहले किया जाता है
- विवाह चयन का माध्यम भी
11. गौर नृत्य (Gaur Dance)
मुख्य बिंदु:
- जनजाति: माड़िया (बस्तर)
विशेषताएँ:
- “गौर” = जंगली बैल
- शिकार की भावना का प्रतीक
12. चैत्र पर्व नृत्य (Chaitra Dance)
मुख्य बिंदु:
- फसल कटाई के बाद किया जाता है
विशेषताएँ:
- देवी अन्नपूर्णा को धन्यवाद
- मोर पंख और रंगीन वेशभूषा
13. मुरिया नृत्य (Muria Dance)
मुख्य बिंदु:
- गोटुल परंपरा से संबंधित
विशेषताएँ:
- लिंगो पेन की पूजा
- प्रमुख नृत्य:
- हुलकी
- करसाना
- पुष कोलांग
परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण सार (Quick Revision)
- सैला → फसल कटाई, लड़के, लाठी
- करमा → करम वृक्ष, उर्वरता, जनजातीय
- सुआ → महिलाएँ, तोता, दीपावली
- पंडवानी → महाभारत कथा
- पंथी → सतनामी, गुरु घासीदास
- राउत नाचा → यादव, कृष्ण
- गेंड़ी → बाँस पर संतुलन
- काकसार → विवाह चयन
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