छत्तीसगढ़ में ब्रिटिश शासन के अंतर्गत प्रमुख जनजातीय विद्रोह

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(Tribal Movements in Chhattisgarh – CGPSC)

छत्तीसगढ़ में ब्रिटिश शासन के दौरान अनेक महत्वपूर्ण जनजातीय विद्रोह हुए, जिनका विवरण निम्न प्रकार से व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत है—


1. हल्बा विद्रोह (1774–1777 ई.)

  • 1774 ई. में अजमेर सिंह के नेतृत्व में प्रारम्भ।
  • कारण: अजमेर सिंह और दरियादेव के मध्य उत्तराधिकार का संघर्ष
  • 1777 ई. में अजमेर सिंह की मृत्यु के बाद विद्रोह समाप्त कर दिया गया।

2. परलकोट विद्रोह (1824–1825 ई.)

  • 1824 ई. में परलकोट के जमींदार गेंद सिंह के नेतृत्व में प्रारम्भ।
  • उद्देश्य: अबूझमाड़ क्षेत्र के लोगों को शोषण से मुक्त करना
  • प्रतीक: धावड़ा वृक्ष की टहनियाँ
  • दमन: कैप्टन पेबे द्वारा।
  • 20 जनवरी 1825 को गेंद सिंह को गिरफ्तार कर फाँसी दी गई।
  • गेंद सिंह को बस्तर का प्रथम शहीद कहा जाता है।

3. तारापुर विद्रोह (1842–1854 ई.)

  • 1842 ई. में दलगंजन सिंह के नेतृत्व में प्रारम्भ।
  • उद्देश्य: कर वृद्धि का विरोध
  • परिणाम: 1854 ई. में मेजर विलियम्स ने कर वृद्धि का आदेश वापस लिया।

4. मेरिया विद्रोह (1842–1863 ई.)

  • नेतृत्व: हिड़मा मांझी
  • कारण: दंतेश्वरी मंदिर में नरबलि प्रथा समाप्त करने का विरोध
  • दमन: कर्नल कैम्पबैल द्वारा।

5. लिंगागिरी विद्रोह (1856 ई.)

  • 1856 ई. में धुरवाराम माड़िया के नेतृत्व में प्रारम्भ।
  • कारण: बस्तर को अंग्रेजी साम्राज्य में शामिल करने का विरोध
  • इसे बस्तर का मुक्ति संग्राम कहा जाता है।
  • धुरवाराम को फाँसी दी गई — इन्हें बस्तर का द्वितीय शहीद माना जाता है।
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6. सोनाखान विद्रोह (1856 ई.)

  • स्थान: सोनाखान (बलौदाबाजार)।
  • नेतृत्व: वीर नारायण सिंह
  • घटना: कसडोल के व्यापारी माखनलाल के गोदाम से अनाज लूटकर जनता में वितरण
  • परिणाम: कैप्टन स्मिथ द्वारा गिरफ्तार कर फाँसी दी गई।
  • इन्हें छत्तीसगढ़ का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम शहीद माना जाता है।

7. सुरेन्द्रसाय का विद्रोह (1857–1884 ई.)

  • स्थान: संबलपुर।
  • नेतृत्व: सुरेन्द्रसाय
  • 1864 ई. में गिरफ्तार कर असीरगढ़ किले में बंद किया गया।
  • 1884 ई. में वहीं मृत्यु।
  • इन्हें छत्तीसगढ़ स्वतंत्रता संग्राम का अंतिम शहीद माना जाता है।

8. सोहागपुर विद्रोह (1857 ई.)

  • स्थान: सरगुजा।
  • तिथि: 15 अगस्त 1857।
  • नेतृत्व: रंगाजी बापू

9. रायपुर सिपाही विद्रोह (1858 ई.)

  • स्थान: रायपुर।
  • तिथि: 18 जनवरी 1858।
  • नेतृत्व: हनुमान सिंह
  • प्रभाव: मंगल पांडे से प्रेरित होकर सार्जेंट सिडवेल की हत्या
  • परिणाम: हनुमान सिंह फरार, उनके 17 साथियों को फाँसी।
  • इन्हें छत्तीसगढ़ का मंगल पांडे कहा जाता है।

10. उदयपुर विद्रोह (1858 ई.)

  • नेतृत्व: कल्याण सिंह
  • विशेषता: सैनिक संगठन के समर्थन से अंग्रेजों का विरोध

11. कोई विद्रोह (1859 ई.)

  • स्थान: पोतेकला।
  • नेतृत्व: नागुल दोरला
  • सहयोग: रामभाई (भोपालपट्टनम) और जग्गा राजू (भेज्जी)
  • उद्देश्य: साल वृक्षों की कटाई रोकना
  • विशेषता: चिपको आंदोलन जैसा स्वरूप
  • नारा: “एक वृक्ष के पीछे एक सर”

12. मुड़िया विद्रोह (1876 ई.)

  • स्थान: बस्तर।
  • नेतृत्व: झाड़ा सिरहा
  • कारण:
    • अंग्रेजों की निरंकुश नीति
    • गोपीनाथ कपड़दार को दीवान बनाना
  • प्रतीक: आम वृक्ष की टहनियाँ
  • 2 मार्च 1876: काला दिवस मनाया गया।
  • दमन हेतु 8 मार्च 1876 को मैक जॉर्ज द्वारा जगदलपुर में मुरिया दरबार आयोजित।

13. भूमकाल विद्रोह (1910 ई.)

  • समय: फरवरी 1910।
  • स्थान: नेतानार।
  • नेतृत्व: गुण्डाधूर
  • विशेषता: छत्तीसगढ़ का सबसे शक्तिशाली जनजातीय विद्रोह
  • कारण:
    • स्थानीय जनता का शोषण और उपेक्षा
    • वनों के उपयोग पर प्रतिबंध
    • शराब निर्माण पर रोक
  • प्रतीक: लाल वृक्ष और आम की टहनी
  • इस विद्रोह का नेतृत्व गुण्डाधूर को रानी सुवर्णकुंवर और दीवान लाल कालेन्द्र द्वारा सौंपा गया।
  • उस समय नेतानार का दीवान: बैजनाथ पंडा

यह पूरा विषय CGPSC एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से तिथियाँ, नेता, कारण और प्रतीक बार-बार पूछे जाते हैं।


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