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सिविल सेवा से क्या तात्पर्य है ?
सिविल सेवा से तात्पर्य सरकारी अधिकारियों के स्थायी, पेशेवर निकाय (जो निर्वाचित नहीं होते) से है, जो नीतियों को लागू करते हैं और प्रशासन, कानून प्रवर्तन और विदेश मामलों जैसी सार्वजनिक सेवाओं का संचालन करते हैं। इन अधिकारियों का चयन कठोर योग्यता-आधारित परीक्षाओं (जैसे भारत में UPSC) के माध्यम से IAS, IPS, IFS और IRS जैसी भूमिकाओं के लिए किया जाता है , और वे सीधे जनता की सेवा करते हैं।
सिविल सेवाओं के प्रमुख पहलू:
- परिभाषा: ऐसे स्थायी सरकारी कर्मचारी जिनकी भर्ती राजनीतिक चुनाव के बजाय योग्यता (कौशल, परीक्षा) के आधार पर की जाती है, जिससे नेतृत्व परिवर्तन के दौरान निरंतरता सुनिश्चित होती है।
- भूमिका: रोजगार सेवाएं चलाना, सार्वजनिक वित्त का प्रबंधन करना और कानून व्यवस्था बनाए रखना जैसे आवश्यक सरकारी कार्यों को पूरा करके जनता की सेवा करना।
- भारत में संरचना:
- अखिल भारतीय सेवाएं: भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस), भारतीय वन सेवा (आईएफओएस)।
- केंद्रीय सिविल सेवाएँ: भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस), भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस), भारतीय लेखापरीक्षा और लेखा सेवा (आईए एंड एएस)।
- भर्ती (भारत): संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा आयोजित, जिसमें जागरूकता, विश्लेषणात्मक कौशल और चरित्र का परीक्षण करने वाली बहु-स्तरीय परीक्षाएं (प्रारंभिक, मुख्य, साक्षात्कार) शामिल हैं।
- महत्व: यह प्रतिष्ठित और चुनौतीपूर्ण करियर के अवसर प्रदान करता है, जिनमें समाज पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालने की क्षमता होती है, और शीर्ष पदों से अत्यधिक प्रभावशाली स्थिति प्राप्त होती है।
संक्षेप में, सिविल सेवक सरकार की रीढ़ की हड्डी होते हैं, जो आवश्यक सेवाएं और प्रशासनिक विशेषज्ञता प्रदान करते हैं, और अक्सर यूपीएससी सीएसई जैसी कठिन राष्ट्रीय परीक्षाओं के माध्यम से उनमें प्रवेश मिलता है।
सिविल सेवा परीक्षा क्या है ?
सिविल सेवा परीक्षा (सीएसई) भारत जैसे देशों में UPSC जैसी संस्थाओं द्वारा आयोजित एक कठिन, योग्यता-आधारित परीक्षा है, जिसका उद्देश्य प्रतिष्ठित सरकारी नौकरियों (IAS, IPS, IFS, IRS आदि) के लिए भर्ती करना है। यह एक बहु-चरणीय प्रक्रिया है (प्रारंभिक, मुख्य, साक्षात्कार) जिसमें सामान्य ज्ञान, तर्क क्षमता और लेखन कौशल का परीक्षण किया जाता है। इसके लिए पात्रता हेतु कम से कम स्नातक की डिग्री आवश्यक है और यह अपने व्यापक पाठ्यक्रम और उच्च प्रतिस्पर्धा के लिए जानी जाती है, जिसमें आयु/प्रयास सीमा भी निर्धारित है।
भारतीय UPSC सिविल सेवा परीक्षा के प्रमुख पहलू:
- संचालन निकाय: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC)।
- उद्देश्य: उच्च स्तरीय प्रशासनिक पदों (IAS, IPS, IFS, IRS आदि) और अन्य ग्रुप ‘ए’ और ‘बी’ सेवाओं के लिए भर्ती करना।
- चरण:
- प्रारंभिक परीक्षा: वस्तुनिष्ठ प्रकार (सामान्य अध्ययन और योग्यता)।
- मुख्य परीक्षा: वर्णनात्मक प्रश्नपत्र जो गहन ज्ञान का परीक्षण करते हैं।
- व्यक्तित्व परीक्षण (साक्षात्कार): सेवा के लिए उपयुक्तता का आकलन करता है।
- पात्रता:
- शिक्षा: किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री।
- आयु: सामान्यतः 21-32 वर्ष (ओबीसी/एससी/एसटी के लिए आयु में छूट के साथ)।
- प्रयास: सीमित (उदाहरण के लिए, सामान्य वर्ग के लिए 6, ओबीसी वर्ग के लिए 9, ST/SC : असीमित)।
- कठिनाई स्तर: पाठ्यक्रम और प्रतिस्पर्धा के कारण इसे सबसे चुनौतीपूर्ण परीक्षाओं में से एक माना जाता है।
परीक्षा के लिए आवेदन करने पर प्रतिबंध(2025 के अनुसार) :
(1) कोई उम्मीदवार, जो किसी पूर्व परीक्षा के परिणाम के आधार पर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अथवा भारतीय विदेश सेवा (IFS) में नियुक्त हो चुका हो और उस सेवा का सदस्य बना हुआ हो, इस परीक्षा अर्थात् सिविल सेवा परीक्षा, में प्रवेश के लिए पात्र नहीं होगा।
यदि कोई ऐसा उम्मीदवार सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा, 2025 के पूर्ण होने के पश्चात् भारतीय प्रशासनिक सेवा/भारतीय विदेश सेवा में नियुक्त हो जाता है तथा वह उस सेवा का सदस्य बना रहता है, तो वह सिविल सेवा (प्रधान) परीक्षा, 2025 में बैठने का पात्र नहीं होगा, भले ही उसने सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा, 2025 में अर्हता प्राप्त कर ली हो।
यह भी प्रावधान है कि यदि सिविल सेवा (प्रधान) परीक्षा, 2025 के प्रारंभ होने के पश्चात् किंतु उसके परीक्षा परिणाम घोषित होने से पूर्व किसी उम्मीदवार की भारतीय प्रशासनिक सेवा/भारतीय विदेश सेवा में नियुक्ति हो जाती है और वह उसी सेवा का सदस्य बना रहता है, तो सिविल सेवा परीक्षा, 2025 के परिणाम के आधार पर उस उम्मीदवार पर किसी सेवा/पद पर नियुक्ति हेतु विचार नहीं किया जाएगा।
(2) यदि किसी उम्मीदवार को किसी पूर्व परीक्षा के परिणाम के आधार पर भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के लिए चयनित अथवा नियुक्त किया गया है, तो वह सिविल सेवा परीक्षा, 2025 के परिणाम के आधार पर भारतीय पुलिस सेवा के विकल्प का चयन करने या उसके आबंटन का पात्र नहीं होगा।
चिकित्सा एवं शारीरिक मानक (2025 के अनुसार) :
सिविल सेवा परीक्षा, 2025 में प्रवेश के लिए उम्मीदवारों का शारीरिक रूप से स्वस्थ होना अनिवार्य है। इसके लिए उम्मीदवारों को 22 जनवरी, 2025 को भारत के राजपत्र (असाधारण) में प्रकाशित परीक्षा की नियमावली के परिशिष्ट-III में दिए गए दिशा-निर्देशों के अनुरूप चिकित्सा एवं शारीरिक मानकों को पूरा करना होगा।
परीक्षा आवेदन शुल्क :
उम्मीदवारों को ₹100/- (सौ रुपये मात्र) शुल्क के रूप में भुगतान करना होगा।
हालाँकि, अनुसूचित जाति (अ.जा.), अनुसूचित जनजाति (अ.ज.जा.), महिला उम्मीदवारों तथा बेंचमार्क दिव्यांग व्यक्तियों की श्रेणी के उम्मीदवारों को शुल्क के भुगतान से पूर्णतः छूट प्राप्त होगी।
शुल्क का भुगतान निम्नलिखित माध्यमों से किया जा सकता है—
- स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की किसी भी शाखा में नकद जमा करके, या
- किसी भी बैंक की नेट बैंकिंग सेवा का उपयोग करके, या
- वीज़ा/मास्टर/रुपे क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड अथवा UPI के माध्यम से।
आवेदन कैसे करें ?
उम्मीदवारों को http://upsconline.gov.in वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन करने के लिए आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) प्लेटफॉर्म पर स्वयं का पंजीकरण करना अनिवार्य है। पंजीकरण पूरा होने के बाद उम्मीदवार परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन भर सकता है।
OTR (वन टाइम रजिस्ट्रेशन) जीवन में केवल एक बार करना होता है और इसे वर्ष भर में किसी भी समय किया जा सकता है। यदि उम्मीदवार का OTR पंजीकरण पहले से किया जा चुका है, तो वह सीधे परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू कर सकता है।
(i) ओटीआर विवरण में संशोधन (पंजीकरण)[2025 के अनुसार]
यदि कोई उम्मीदवार अपने ओटीआर (वन टाइम रजिस्ट्रेशन) विवरण में किसी प्रकार का परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे पंजीकरण के बाद अपने पूरे जीवनकाल में केवल एक बार संशोधन करने की अनुमति होगी।
ओटीआर विवरण में डेटा संशोधन की सुविधा, आयोग की किसी भी परीक्षा के लिए उम्मीदवार के प्रथम अंतिम आवेदन की आवेदन विंडो बंद होने के अगले दिन से 7 दिनों तक उपलब्ध रहेगी।
इस संबंध में, यदि कोई उम्मीदवार ओटीआर पंजीकरण के उपरांत इस परीक्षा के लिए पहली बार आवेदन कर रहा है, तो ओटीआर विवरण में संशोधन करने की अंतिम तिथि 18.02.2025 होगी।
(ii) आवेदन प्रपत्र में संशोधन (ओटीआर विवरण/पंजीकरण के अतिरिक्त):[2025 के अनुसार]
आयोग ने इस परीक्षा की आवेदन विंडो बंद होने के 7 दिनों के बाद, इस परीक्षा के लिए आवेदन प्रपत्र के किसी भी भाग/भागों में संशोधन की सुविधा प्रदान करने का निर्णय लिया है। यह संशोधन विंडो खुलने की तिथि से 7 दिनों तक, अर्थात 12.02.2025 से 18.02.2025 तक उपलब्ध रहेगी।
यदि कोई उम्मीदवार इस अवधि के दौरान अपने ओटीआर विवरण में कोई परिवर्तन करना चाहता है, तो वह ओटीआर प्लेटफॉर्म में लॉग-इन करके निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवश्यक कार्रवाई कर सकता है।
अन्य शब्दों में, आवेदन प्रपत्र में संशोधन हेतु उपलब्ध विंडो के माध्यम से ओटीआर विवरण (पंजीकरण) में कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता।
(iii) आवेदन जमा करने के बाद उम्मीदवारों को अपना आवेदन वापस लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
सभी उम्मीदवारों के लिए निर्देश:
सभी उम्मीदवारों को, चाहे वे पहले से सरकारी नौकरी, सरकारी औद्योगिक उपक्रम, इसी प्रकार के अन्य संगठनों या गैर-सरकारी संस्थाओं में नियुक्त हों, अपना आवेदन प्रपत्र सीधे आयोग को भेजना होगा।
जो व्यक्ति पहले से सरकारी नौकरी में स्थायी या अस्थायी रूप से कार्यरत हों अथवा किसी कार्य के लिए विशेष रूप से नियुक्त कर्मचारी हों (जिसमें आकस्मिक या दैनिक वेतन पर नियुक्त व्यक्ति शामिल नहीं हैं), तथा जो लोक उपक्रमों के अंतर्गत कार्यरत हों, उन्हें यह अंडरटेकिंग (प्रतिज्ञापन) प्रस्तुत करना होगा कि उन्होंने लिखित रूप में अपने कार्यालय/विभाग के अध्यक्ष को सूचित कर दिया है कि उन्होंने इस परीक्षा के लिए आवेदन किया है।
उम्मीदवारों को ध्यान रखना चाहिए कि यदि आयोग को उनके नियोजक से परीक्षा में आवेदन करने या परीक्षा में बैठने की अनुमति रोके जाने संबंधी कोई पत्र प्राप्त होता है, तो उनका आवेदन पत्र अस्वीकृत किया जा सकता है अथवा उनकी उम्मीदवारी रद्द की जा सकती है।
टिप्पणी–1: उम्मीदवार को अपने ऑनलाइन आवेदन प्रपत्र में परीक्षा केंद्र भरते समय अत्यंत सावधानीपूर्वक निर्णय लेना चाहिए। यदि कोई उम्मीदवार आयोग द्वारा जारी प्रवेश प्रमाण पत्र में दर्शाए गए केंद्र के अलावा किसी अन्य केंद्र पर परीक्षा देता है, तो उसके प्रश्नपत्रों का मूल्यांकन नहीं किया जाएगा तथा उसकी उम्मीदवारी भी रद्द की जा सकती है।
टिप्पणी–2:
दृष्टिहीन, लोकोमोटर दिव्यांगता (दोनों हाथ प्रभावित – BA) तथा प्रमस्तिष्कीय पक्षाघात श्रेणियों के अंतर्गत आने वाले बेंचमार्क दिव्यांगता वाले उम्मीदवारों को, मांग किए जाने पर स्क्राइब (लेखक) की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
आरपीडब्ल्यूडी अधिनियम, 2016 की धारा 2(द) के अंतर्गत यथापरिभाषित बेंचमार्क दिव्यांगता की अन्य श्रेणियों के उम्मीदवारों को, परिशिष्ट–V में दिए गए प्रपत्र के अनुसार, किसी सरकारी स्वास्थ्य देखभाल संस्था के मुख्य चिकित्सा अधिकारी / सिविल सर्जन / चिकित्सा अधीक्षक द्वारा जारी इस आशय का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा कि संबंधित उम्मीदवार लिखने में शारीरिक रूप से अक्षम है तथा उसकी ओर से परीक्षा लिखने के लिए स्क्राइब की सेवाएँ लेना आवश्यक है।
ऐसे उम्मीदवारों को स्क्राइब की सुविधा प्रदान की जाएगी। स्क्राइब स्वयं लाने या आयोग से उपलब्ध कराने का अनुरोध करने का विकल्प उम्मीदवार के विवेक पर होगा।
स्क्राइब से संबंधित विवरण, अर्थात स्वयं का स्क्राइब या आयोग द्वारा प्रदान किया गया स्क्राइब, तथा यदि उम्मीदवार अपना स्क्राइब लाना चाहता है, तो उससे संबंधित विवरण ऑनलाइन आवेदन प्रपत्र भरते समय मांगा जाएगा। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन प्रपत्र में आवश्यक प्रावधान किए गए हैं।
टिप्पणी–3:
स्वयं के अथवा आयोग द्वारा उपलब्ध कराए गए स्क्राइब की योग्यता, परीक्षा के लिए निर्धारित न्यूनतम योग्यता मानदंड से अधिक नहीं होनी चाहिए। तथापि, स्क्राइब की योग्यता कम से कम मैट्रिक (10वीं) या उससे अधिक होना अनिवार्य है।
टिप्पणी–4:
दृष्टिहीनता, लोकोमोटर दिव्यांगता (दोनों बाजुएँ प्रभावित – BA) तथा प्रमस्तिष्कीय पक्षाघात श्रेणियों के अंतर्गत आने वाले बेंचमार्क दिव्यांगता वाले उम्मीदवारों को परीक्षा के प्रत्येक घंटे के लिए 20 मिनट का प्रतिपूरक समय प्रदान किया जाएगा।
बेंचमार्क दिव्यांगता की अन्य श्रेणियों के उम्मीदवारों को, परिशिष्ट–V में दिए गए प्रपत्र के अनुसार, किसी सरकारी स्वास्थ्य देखभाल संस्था के मुख्य चिकित्सा अधिकारी / सिविल सर्जन / चिकित्सा अधीक्षक द्वारा जारी इस आशय का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने पर कि संबंधित उम्मीदवार की लेखन क्षमता प्रभावित है, यह सुविधा प्रदान की जाएगी।
टिप्पणी–5:
सिविल सेवा परीक्षा, 2025 के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को निम्नलिखित सूचनाएँ ऑनलाइन आवेदन प्रपत्र भरते समय ही देना अनिवार्य होगा—
(क) सिविल सेवा (प्रधान) परीक्षा तथा भारतीय वन सेवा (प्रधान) परीक्षा के लिए परीक्षा केंद्रों का विवरण
(ख) दोनों परीक्षाओं के लिए चुने गए वैकल्पिक विषय
(ग) सिविल सेवा (प्रधान) परीक्षा के लिए परीक्षा देने का माध्यम
(घ) वैकल्पिक विषय के प्रश्नपत्र के लिए परीक्षा माध्यम का चयन, जब सिविल सेवा (प्रधान) परीक्षा का माध्यम भारतीय भाषा चुना गया हो
(ङ) सिविल सेवा (प्रधान) परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रपत्र भरते समय अनिवार्य भारतीय भाषा का चयन
एक बार ऑनलाइन आवेदन प्रपत्र जमा करने के बाद, उपरोक्त सूचनाओं में किसी भी प्रकार के परिवर्तन हेतु किए गए अनुरोधों पर आयोग द्वारा कोई विचार नहीं किया जाएगा।
परीक्षा में आवेदन करने वाले उम्मीदवार यह सुनिश्चित करें कि वे परीक्षा में प्रवेश के लिए पात्रता की सभी शर्तें पूरी करते हों। परीक्षा के उन सभी स्तरों के लिए, जिनके लिए आयोग द्वारा उन्हें प्रवेश दिया गया है—अर्थात प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य (लिखित) परीक्षा तथा साक्षात्कार/व्यक्तित्व परीक्षण—उनका प्रवेश पूर्णतः अनंतिम होगा और यह उनके द्वारा निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करने पर निर्भर करेगा।
यदि प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य (लिखित) परीक्षा अथवा साक्षात्कार/व्यक्तित्व परीक्षण से पूर्व या पश्चात सत्यापन के दौरान यह पाया जाता है कि उम्मीदवार पात्रता की किसी भी शर्त को पूरा नहीं करता है, तो आयोग द्वारा उसकी उम्मीदवारी रद्द कर दी जाएगी।
परीक्षा में बैठने के लिए उम्मीदवार की पात्रता या अपात्रता के संबंध में आयोग का निर्णय अंतिम होगा।
यदि उम्मीदवारों द्वारा किए गए दावे सही नहीं पाए जाते हैं, तो उनके विरुद्ध आयोग द्वारा सिविल सेवा परीक्षा, 2025 की नियमावली के नियम 19 की शर्तों के अनुसार, जो नीचे उद्धृत हैं, अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
(1) वह उम्मीदवार जो निम्नलिखित कदाचार का दोषी हो या आयोग द्वारा दोषी घोषित किया गया हो—
(क) अपनी उम्मीदवारी के लिए निम्नलिखित तरीकों से समर्थन प्राप्त किया हो, अर्थात्—
(i) गैरकानूनी रूप से परितोषण (रिश्वत) की पेशकश करना, या
(ii) दबाव डालना, या
(iii) परीक्षा आयोजित करने से संबंधित किसी व्यक्ति को ब्लैकमेल करना या ब्लैकमेल करने की धमकी देना;
(ख) प्रतिरूपधारण (प्रतिनियोजन/नकल पहचान), या
(ग) किसी अन्य व्यक्ति से छद्म रूप से कार्यसाधन कराया हो, या
(घ) जाली प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किए हों अथवा ऐसे प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किए हों जिनमें तथ्यों से छेड़छाड़ की गई हो, या
(ङ) आवेदन फॉर्म में वास्तविक फोटो/हस्ताक्षर के स्थान पर असंगत फोटो/हस्ताक्षर अपलोड किए हों, या
(च) गलत या झूठे वक्तव्य दिए हों या किसी महत्वपूर्ण तथ्य को छिपाया हो, या
(छ) परीक्षा के लिए अपनी उम्मीदवारी के संबंध में निम्नलिखित अनुचित साधनों का उपयोग किया हो, अर्थात्—
(i) गलत तरीके से प्रश्न-पत्र की प्रति प्राप्त करना;
(ii) परीक्षा से संबंधित गोपनीय कार्य से जुड़े किसी व्यक्ति के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करना;
(iii) परीक्षकों को प्रभावित करना;
(ज) परीक्षा के दौरान उम्मीदवार के पास अनुचित साधन पाए गए हों या उनका उपयोग किया गया हो, या
(झ) उत्तर पुस्तिकाओं पर असंगत बातें लिखना, भद्दे रेखाचित्र बनाना अथवा आपत्तिजनक सामग्री लिखना, या
(ञ) परीक्षा भवन में दुर्व्यवहार करना, जिसमें उत्तर पुस्तिकाएँ फाड़ना, अन्य अभ्यर्थियों को परीक्षा का बहिष्कार करने के लिए उकसाना, अव्यवस्था उत्पन्न करना अथवा इसी प्रकार की अन्य स्थितियाँ पैदा करना शामिल है।
(ट) परीक्षा संचालन के लिए आयोग द्वारा नियुक्त कर्मचारियों को परेशान किया हो या उन्हें किसी अन्य प्रकार की शारीरिक क्षति पहुँचाई हो; अथवा
(ठ) परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन (चाहे वह स्विच ऑफ ही क्यों न हो), पेजर या किसी अन्य प्रकार का इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, प्रोग्राम किए जा सकने वाला डिवाइस, पेन ड्राइव जैसे किसी भी प्रकार का स्टोरेज मीडिया, स्मार्ट वॉच, कैमरा, ब्लूटूथ डिवाइस अथवा संचार यंत्र के रूप में प्रयोग किया जा सकने वाला कोई भी अन्य संबंधित उपकरण (चाहे वह बंद हो या चालू) का प्रयोग करते हुए या अपने पास पाया गया हो; अथवा
(ड) परीक्षा की अनुमति देते समय उम्मीदवार को भेजे गए प्रवेश प्रमाण-पत्रों के साथ जारी आदेशों का उल्लंघन किया हो; अथवा
(ढ) उपर्युक्त खंडों में निर्दिष्ट किसी भी या सभी कृत्यों द्वारा, जैसा भी मामला हो, अवप्रेरित करने का प्रयास किया हो;
तो ऐसे उम्मीदवार के विरुद्ध आपराधिक अभियोजन (क्रिमिनल प्रॉसिक्यूशन) चलाया जा सकता है और साथ ही उसे आयोग द्वारा इन नियमों के अंतर्गत उस परीक्षा, जिसका वह उम्मीदवार है, में बैठने के लिए अयोग्य ठहराया जाएगा तथा/अथवा उसे स्थायी रूप से या निर्दिष्ट अवधि के लिए—
(i) आयोग द्वारा ली जाने वाली किसी भी परीक्षा या चयन से वंचित किया जाएगा;
(ii) केंद्र सरकार के अधीन किसी भी नौकरी से वंचित किया जाएगा।
यदि उम्मीदवार पहले से ही सरकारी सेवा में है, तो उसके विरुद्ध उपयुक्त नियमों के अंतर्गत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
परंतु शर्त यह है कि इस नियम के अंतर्गत कोई दंड तब तक नहीं दिया जाएगा, जब तक—
(i) उम्मीदवार को इस संबंध में लिखित अभ्यावेदन प्रस्तुत करने का अवसर न दिया जाए; और
(ii) उम्मीदवार द्वारा निर्धारित समय में प्रस्तुत अभ्यावेदन पर, यदि कोई हो, विधिवत विचार न कर लिया जाए।
(2) कोई भी व्यक्ति, जो आयोग द्वारा उपखंड (क) से (ड) में उल्लिखित कुकृत्यों में से किसी कुकृत्य को करने में किसी अन्य उम्मीदवार के साथ मिलीभगत या सहयोग का दोषी पाया जाता है, उसके विरुद्ध नियम 19(1) के खंड (ढ) के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।
टिप्पणी:
यदि कोई उम्मीदवार अनुचित साधन रखते हुए या उनका प्रयोग करते हुए पाया जाता है, तो जैसे ही यह कृत्य परीक्षा से जुड़े पदाधिकारियों के संज्ञान में आता है, उसे इस परीक्षा में आगे शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी और आयोग के परामर्श से उसके विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
इसके अतिरिक्त, ऐसे उम्मीदवार को उक्त परीक्षा के बाद के किसी भी पेपर में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

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